हरियाणा ने एनीमिया उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य इस साल की पहली तिमाही में देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल हरियाणा 8वें स्थान पर था। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य ने विभिन्न आयु वर्गों को लक्षित किया है, जिनमें 6 से 59 महीने तक के बच्चे, 5 से 9 वर्ष के बच्चे, 10 से 19 वर्ष के किशोर, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं तथा प्रजनन आयु की महिलाएं शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा ने 59 महीने तक के 77% बच्चों और 5 से 9 वर्ष तक के 95% बच्चों को कवर किया है। वहीं किशोर वर्ग में 95% और प्रजनन आयु व गर्भवती/स्तनपान कराने वाली महिलाओं में 93% को अभियान से जोड़ा गया है। इससे स्पष्ट है कि हरियाणा धीरे-धीरे दशकों पुरानी एनीमिया की समस्या से बाहर निकल रहा है। ऐसे हुआ सुधार
राज्य में एनीमिया की स्थिति में सुधार किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का असर है। लाभार्थियों को रोग निरोधी आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की नियमित खुराक उपलब्ध कराई गई। साथ ही खाद्य पदार्थों का आयरन से सुदृढ़ीकरण किया गया, ताकि लोगों को पोषण संतुलित भोजन मिल सके। सरकार ने स्कूलों और समुदाय स्तर पर एनीमिया की जांच और उपचार की व्यवस्था की। इसके साथ ही मलेरिया और फ्लोरोसिस जैसे गैर-पोषण संबंधी कारणों पर भी ध्यान दिया गया, ताकि एनीमिया के पीछे छिपे कारकों को खत्म किया जा सके। इसके अतिरिक्त, अटल (संपूर्ण एनीमिया सीमा सुनिश्चित करना) अभियान लागू किया गया। इस अभियान के अंतर्गत लाभार्थियों की ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया, जिससे समय पर निगरानी और सुधार संभव हो पाया। हरियाणा में सबसे अधिक पीड़ित
एनीमिया मामलों में देशभर में हरियाणा 11वें और चंडीगढ़ 12वें नंबर पर हैं, जहां 15 से 49 वर्ष की महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। तीन महीने पहले की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में स्थिति चंडीगढ़ से अधिक खराब है, जहां 60.4 फीसद महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है। पंजाब में यह दर 58.7 और हिमाचल में यह दर 53.0 फीसद है। वहीं, हरियाणा प्रदेश में एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की संख्या पंजाब से 3.2 और हिमाचल से 7.5 प्रतिशत ज्यादा है। हरियाणा एनएचएम निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया, हम ‘6x6x6’ एप्रोच को लागू करने में सफल रहे, जिससे हमारे प्रदर्शन में सुधार हुआ। हमने छह संस्थागत तंत्रों के माध्यम से छह हस्तक्षेपों के साथ छह आयु समूहों को लक्षित किया। हम समझते हैं कि स्तनपान कराने वाली माताओं को शामिल करना एक चुनौती है जिसका समाधान किया जाना आवश्यक है। हम इस चुनौती से पार पाने और हरियाणा को सौ प्रतिशत एनीमिया मुक्त बनाने की पहल पर काम कर रहे हैं।
हरियाणा ने एनीमिया उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य इस साल की पहली तिमाही में देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल हरियाणा 8वें स्थान पर था। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य ने विभिन्न आयु वर्गों को लक्षित किया है, जिनमें 6 से 59 महीने तक के बच्चे, 5 से 9 वर्ष के बच्चे, 10 से 19 वर्ष के किशोर, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं तथा प्रजनन आयु की महिलाएं शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा ने 59 महीने तक के 77% बच्चों और 5 से 9 वर्ष तक के 95% बच्चों को कवर किया है। वहीं किशोर वर्ग में 95% और प्रजनन आयु व गर्भवती/स्तनपान कराने वाली महिलाओं में 93% को अभियान से जोड़ा गया है। इससे स्पष्ट है कि हरियाणा धीरे-धीरे दशकों पुरानी एनीमिया की समस्या से बाहर निकल रहा है। ऐसे हुआ सुधार
राज्य में एनीमिया की स्थिति में सुधार किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का असर है। लाभार्थियों को रोग निरोधी आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की नियमित खुराक उपलब्ध कराई गई। साथ ही खाद्य पदार्थों का आयरन से सुदृढ़ीकरण किया गया, ताकि लोगों को पोषण संतुलित भोजन मिल सके। सरकार ने स्कूलों और समुदाय स्तर पर एनीमिया की जांच और उपचार की व्यवस्था की। इसके साथ ही मलेरिया और फ्लोरोसिस जैसे गैर-पोषण संबंधी कारणों पर भी ध्यान दिया गया, ताकि एनीमिया के पीछे छिपे कारकों को खत्म किया जा सके। इसके अतिरिक्त, अटल (संपूर्ण एनीमिया सीमा सुनिश्चित करना) अभियान लागू किया गया। इस अभियान के अंतर्गत लाभार्थियों की ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया, जिससे समय पर निगरानी और सुधार संभव हो पाया। हरियाणा में सबसे अधिक पीड़ित
एनीमिया मामलों में देशभर में हरियाणा 11वें और चंडीगढ़ 12वें नंबर पर हैं, जहां 15 से 49 वर्ष की महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। तीन महीने पहले की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में स्थिति चंडीगढ़ से अधिक खराब है, जहां 60.4 फीसद महिलाएं एनीमिया से पीड़ित है। पंजाब में यह दर 58.7 और हिमाचल में यह दर 53.0 फीसद है। वहीं, हरियाणा प्रदेश में एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की संख्या पंजाब से 3.2 और हिमाचल से 7.5 प्रतिशत ज्यादा है। हरियाणा एनएचएम निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया, हम ‘6x6x6’ एप्रोच को लागू करने में सफल रहे, जिससे हमारे प्रदर्शन में सुधार हुआ। हमने छह संस्थागत तंत्रों के माध्यम से छह हस्तक्षेपों के साथ छह आयु समूहों को लक्षित किया। हम समझते हैं कि स्तनपान कराने वाली माताओं को शामिल करना एक चुनौती है जिसका समाधान किया जाना आवश्यक है। हम इस चुनौती से पार पाने और हरियाणा को सौ प्रतिशत एनीमिया मुक्त बनाने की पहल पर काम कर रहे हैं।