2011 की जनगणना के मुताबिक, 7 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति जो किसी भी भाषा को समझकर पढ़ और लिख सकता है, उसे साक्षर माना जाता है। हालांकि, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में साक्षरता के मायने अलग-अलग हैं। सिर्फ अक्षर ज्ञान को ही साक्षरता नहीं माना जाता। यूनेस्को ने साल 2025 में डिजिटल लिटरेसी को थीम बनाया है। आज इंटरनेशनल लिटरेसी डे पर पढ़ें केरल की उन गांवों की कहानियां, जिन्होंने साक्षरता को बड़े पैमाने में अपनाया… ……………………………… सारक्षता से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भारत में ऊंचे पदों पर केवल 19% महिलाएं कार्यरत: नौकरी में स्थिरता के लिए लम्बा संघर्ष करती है, शिक्षा में कमी और असमानता बड़ी चुनौतियां भारत में महिलाओं की जनसंख्या 65 करोड़ से ज्यादा है। इसके बाद भी केवल 19 प्रतिशत यानी 12 करोड़ महिलाएं ही ऊंचे पदों पर काम कर रहीं है। टीमलीज की एक रिपोर्ट के अनुसार एंट्री लेवल पर केवल 46 प्रतिशत पदों पर महिलाएं है। ये रिपोर्ट महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर पर भी प्रकाश डालती है, जो 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई है। पूरी खबर पढ़ें…
2011 की जनगणना के मुताबिक, 7 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति जो किसी भी भाषा को समझकर पढ़ और लिख सकता है, उसे साक्षर माना जाता है। हालांकि, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में साक्षरता के मायने अलग-अलग हैं। सिर्फ अक्षर ज्ञान को ही साक्षरता नहीं माना जाता। यूनेस्को ने साल 2025 में डिजिटल लिटरेसी को थीम बनाया है। आज इंटरनेशनल लिटरेसी डे पर पढ़ें केरल की उन गांवों की कहानियां, जिन्होंने साक्षरता को बड़े पैमाने में अपनाया… ……………………………… सारक्षता से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भारत में ऊंचे पदों पर केवल 19% महिलाएं कार्यरत: नौकरी में स्थिरता के लिए लम्बा संघर्ष करती है, शिक्षा में कमी और असमानता बड़ी चुनौतियां भारत में महिलाओं की जनसंख्या 65 करोड़ से ज्यादा है। इसके बाद भी केवल 19 प्रतिशत यानी 12 करोड़ महिलाएं ही ऊंचे पदों पर काम कर रहीं है। टीमलीज की एक रिपोर्ट के अनुसार एंट्री लेवल पर केवल 46 प्रतिशत पदों पर महिलाएं है। ये रिपोर्ट महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर पर भी प्रकाश डालती है, जो 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई है। पूरी खबर पढ़ें…