सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे काम नहीं करने के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिए है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने आधार बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8 महीने के दौरान पुलिस हिरासत में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में ही आदेश दिया था कि पुलिस थानों में मानवाधिकार उल्लंघन पर रोक लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। अब पढ़िए भास्कर की खबर… राजस्थान में इस साल के करीब 8 महीने के अंदर पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं। अकेले उदयपुर संभाग में 7 मौतें हुई हैं। अगस्त में राजसमंद जिले के कांकरोली थाने और उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाने में दो सर्राफा व्यापारियों की मौत हुई थी। सभी केस में आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर थानाधिकारी कभी कैमरे, हार्ड डिस्क खराब होने, स्टोरेज फुल, बैकअप नहीं होने तो कभी गोपनीयता भंग होने का गैरजिम्मेदाराना जवाब देते हैं। इस कारण सच हवालात से कभी बाहर आ ही नहीं पाता है। थानों में मौतें व आरोपी के साथ क्रूरता नहीं हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से लेकर सूचना आयोग तक के आदेश आ चुके हैं। इसमें कहा गया है कि सीसीटीवी गोपनीयता के लिए नहीं, बल्कि थाने में निष्पक्षता, पारदर्शिता के लिए है। हाल ही में हुई घटनाओं में सर्राफा व्यापारियों को चोरी के जेवर खरीदने के आरोप लगाकर पूछताछ करने के लिए लाया गया था। कांकरोली (राजसमंद) में भीलवाड़ा के रहने वाले खूबचंद सोनी (मृतक) और ऋषभदेव (उदयपुर) में सुरेश पांचाल (मृतक) डूंगरपुर जिले के रहने वाले थे। चारों जिलों में तीन दिनों तक धरना-प्रदर्शन हुए थे। औपचारिकता में मुआवजे और कुछ पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर इतिश्री कर ली जाती है। मौत के वास्तविक दोषियों को कभी सजा नहीं मिलती है। आरटीआई एक्टिविस्ट जयवंत भैरविया ने बताया कि पहली बात ताे पुलिस सीसीटीवी देती नहीं है। थानों में ऐसी जगह रिमांड रूम होते हैं, जहां कैमरे की नजर नहीं जाती है। सीटीवी को लेकर सूचना आयोग व काेर्ट के बड़े फैसले सुप्रीम कोर्ट का आदेश : परमवीर सैनी बनाम बलजीत प्रकरण मेंं कोर्ट ने कहा था कि पुलिस थाने में कैमरे लगें और 18 महीने तक फुटेज रखना जरूरी है। हिरासत में हो रही मौत और क्रूरता को लेकर सीसीटीवी हर किसी को देना जरूरी है। यह फैसला 2020 में आया था। सूचना आयोग के फैसले उदयपुर रेंज आईजी गौरव श्रीवास्तव ने बताया- उदयपुर संभाग में पुलिस हिरासत में हाल में दो मौतें हुई हैं। दोनों ही मामलों में सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पक्ष के हैं। इसी के आधार पर पुलिस ने परिजनों को संतुष्ट किया था। एविडेंस के तौर पर सारी चीजें न्यायालय में निश्चित तौर पर जमा करवानी पड़ती है। आरटीआई मामले में अगर किसी स्थानीय अधिकारी ने सीसीटीवी फुटेज नहीं दिए हैं तो आगे अपील की जा सकती है। — राजस्थान के पुलिस थानों में मौत की ये खबरें भी पढ़िए… उदयपुर में पुलिस हिरासत में ज्वेलर की मौत:ASI समेत 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड; घरवालों ने कहा था- टॉर्चर करके मार डाला उदयपुर में पुलिस हिरासत में ज्वेलर की मौत पर हंगामा हो गया। घरवालों ने पुलिस पर टॉर्चर कर मार डालने का आरोप लगाया था। हंगामे और प्रदर्शन के बाद एसपी योगेश गोयल ने ASI समेत 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। मामला ऋषभदेव थाने का है। पढ़ें पूरी खबर… भीलवाड़ा के ज्वेलर की राजसमंद के थाने में मौत:चोरी के केस में पूछताछ के लिए बुलाया था; परिजनों का आरोप- टॉर्चर किया, मुआवजे की मांग चोरी के मामले में थाने बुलाए गए एक ज्वेलर की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के दौरान ज्वेलर को टॉर्चर किया गया। इसके कारण उसने थाने में ही दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर…
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे काम नहीं करने के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिए है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने आधार बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 8 महीने के दौरान पुलिस हिरासत में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में ही आदेश दिया था कि पुलिस थानों में मानवाधिकार उल्लंघन पर रोक लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। अब पढ़िए भास्कर की खबर… राजस्थान में इस साल के करीब 8 महीने के अंदर पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं। अकेले उदयपुर संभाग में 7 मौतें हुई हैं। अगस्त में राजसमंद जिले के कांकरोली थाने और उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाने में दो सर्राफा व्यापारियों की मौत हुई थी। सभी केस में आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर थानाधिकारी कभी कैमरे, हार्ड डिस्क खराब होने, स्टोरेज फुल, बैकअप नहीं होने तो कभी गोपनीयता भंग होने का गैरजिम्मेदाराना जवाब देते हैं। इस कारण सच हवालात से कभी बाहर आ ही नहीं पाता है। थानों में मौतें व आरोपी के साथ क्रूरता नहीं हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से लेकर सूचना आयोग तक के आदेश आ चुके हैं। इसमें कहा गया है कि सीसीटीवी गोपनीयता के लिए नहीं, बल्कि थाने में निष्पक्षता, पारदर्शिता के लिए है। हाल ही में हुई घटनाओं में सर्राफा व्यापारियों को चोरी के जेवर खरीदने के आरोप लगाकर पूछताछ करने के लिए लाया गया था। कांकरोली (राजसमंद) में भीलवाड़ा के रहने वाले खूबचंद सोनी (मृतक) और ऋषभदेव (उदयपुर) में सुरेश पांचाल (मृतक) डूंगरपुर जिले के रहने वाले थे। चारों जिलों में तीन दिनों तक धरना-प्रदर्शन हुए थे। औपचारिकता में मुआवजे और कुछ पुलिसकर्मियों को लाइनहाजिर कर इतिश्री कर ली जाती है। मौत के वास्तविक दोषियों को कभी सजा नहीं मिलती है। आरटीआई एक्टिविस्ट जयवंत भैरविया ने बताया कि पहली बात ताे पुलिस सीसीटीवी देती नहीं है। थानों में ऐसी जगह रिमांड रूम होते हैं, जहां कैमरे की नजर नहीं जाती है। सीटीवी को लेकर सूचना आयोग व काेर्ट के बड़े फैसले सुप्रीम कोर्ट का आदेश : परमवीर सैनी बनाम बलजीत प्रकरण मेंं कोर्ट ने कहा था कि पुलिस थाने में कैमरे लगें और 18 महीने तक फुटेज रखना जरूरी है। हिरासत में हो रही मौत और क्रूरता को लेकर सीसीटीवी हर किसी को देना जरूरी है। यह फैसला 2020 में आया था। सूचना आयोग के फैसले उदयपुर रेंज आईजी गौरव श्रीवास्तव ने बताया- उदयपुर संभाग में पुलिस हिरासत में हाल में दो मौतें हुई हैं। दोनों ही मामलों में सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पक्ष के हैं। इसी के आधार पर पुलिस ने परिजनों को संतुष्ट किया था। एविडेंस के तौर पर सारी चीजें न्यायालय में निश्चित तौर पर जमा करवानी पड़ती है। आरटीआई मामले में अगर किसी स्थानीय अधिकारी ने सीसीटीवी फुटेज नहीं दिए हैं तो आगे अपील की जा सकती है। — राजस्थान के पुलिस थानों में मौत की ये खबरें भी पढ़िए… उदयपुर में पुलिस हिरासत में ज्वेलर की मौत:ASI समेत 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड; घरवालों ने कहा था- टॉर्चर करके मार डाला उदयपुर में पुलिस हिरासत में ज्वेलर की मौत पर हंगामा हो गया। घरवालों ने पुलिस पर टॉर्चर कर मार डालने का आरोप लगाया था। हंगामे और प्रदर्शन के बाद एसपी योगेश गोयल ने ASI समेत 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। मामला ऋषभदेव थाने का है। पढ़ें पूरी खबर… भीलवाड़ा के ज्वेलर की राजसमंद के थाने में मौत:चोरी के केस में पूछताछ के लिए बुलाया था; परिजनों का आरोप- टॉर्चर किया, मुआवजे की मांग चोरी के मामले में थाने बुलाए गए एक ज्वेलर की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के दौरान ज्वेलर को टॉर्चर किया गया। इसके कारण उसने थाने में ही दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर…