उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर रोक और नेताओं, वीआईपी और प्रभावशाली लोगों के विशेष प्रवेश को लेकर मामला अब इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि दूर-दराज से आने वाले लाखों भक्त बाहर से ही बाबा महाकाल के दर्शन करने को मजबूर हैं, जबकि नेता और वीआईपी आसानी से गर्भगृह में प्रवेश पा रहे हैं। गुरुवार को युगलपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें प्रदेश सरकार, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट समिति, उज्जैन कलेक्टर और एसपी को पक्षकार बनाया गया हैं। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। कलेक्टर-एसपी को पक्षकार बनाया
इंदौर के याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने एडवोकेट चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में दलील दी कि प्रभावशाली लोगों को महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में पूजा का अवसर मिलता है, जबकि दूर-दराज से आने वाले लाखों श्रद्धालु केवल बाहर से ही दर्शन करने को मजबूर रहते हैं। आरटीआई में मंदिर समिति ने नहीं दी जानकारी
21 जुलाई को इंदौर विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष द्वारा जबरन महाकाल मंदिर में प्रवेश करने के मामले के बाद, दर्पण अवस्थी ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और देशभर से आने वाले भक्तों को गर्भगृह में दर्शन की अनुमति दिलाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनके वकील चर्चित शास्त्री ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के माध्यम से महाकाल मंदिर समिति से यह जानकारी मांगी कि नेता, अधिकारी और अन्य प्रभावशाली लोगों को गर्भगृह में प्रवेश किसके आदेश पर दिया जाता है, लेकिन समिति ने किसी भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया। याचिका में मांग- शुल्क निर्धारित कर प्रवेश शुरू करे
महाकालेश्वर ज्योतिलिंग के गर्भगृह में प्रवेश पर लगी रोक को लेकर लगी याचिका में मांग की गई है कि वीआईपी के नाम पर गर्भगृह में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाए। ऐसी नीति बनाई जाए जिसके तहत आम भक्त भी गर्भगृह में जाकर बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें। भले ही इसके लिए शुल्क निर्धारित कर दिया जाए। महापौर ने दिखाया रास्ता तो लगाई याचिका
याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने बताया कि 8 महीने महाकाल मंदिर गया था, वहां देखा कि आम भक्त पीछे से दर्शन कर रहे हैं। वीआईपी लोग गर्भगृह से दर्शन कर रहे थे। उन्होंने इस स्थिति का वीडियो बनाकर शेयर किया, जिसे लगभग एक मिलियन से अधिक लोग देख चुके हैं। अवस्थी ने कहा कि उन्होंने कई राजनैतिक हस्तियों से संपर्क किया, लेकिन किसी से मदद नहीं मिली। इंदौर महापौर पुष्य मित्र भार्गव ने उन्हें सलाह दी कि इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाएं। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इस खबर पर आप अपनी राय यहां दे सकते हैं। ये खबर भी पढ़ें… फिर टूटा महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश का नियम एक आईपीएस सहित दो डिप्टी कलेक्टर और करीब 9 अधिकारियों सहित सैकड़ों कर्मचारी की तैनाती के बाद भी एक बार फिर महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के नियम तोड़े गए। मामला सोमवार दोपहर का है। कल्याणी समूह के प्रमुख अरबपति व्यवसायी बाबा साहेब नीलकंठ कल्याणी और उनकी पत्नी ने बिना अनुमति के गर्भगृह में प्रवेश कर करीब 10 मिनट तक पूजन अर्चन किया। पूरी खबर पढ़ें…
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर रोक और नेताओं, वीआईपी और प्रभावशाली लोगों के विशेष प्रवेश को लेकर मामला अब इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि दूर-दराज से आने वाले लाखों भक्त बाहर से ही बाबा महाकाल के दर्शन करने को मजबूर हैं, जबकि नेता और वीआईपी आसानी से गर्भगृह में प्रवेश पा रहे हैं। गुरुवार को युगलपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें प्रदेश सरकार, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट समिति, उज्जैन कलेक्टर और एसपी को पक्षकार बनाया गया हैं। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। कलेक्टर-एसपी को पक्षकार बनाया
इंदौर के याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने एडवोकेट चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में दलील दी कि प्रभावशाली लोगों को महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में पूजा का अवसर मिलता है, जबकि दूर-दराज से आने वाले लाखों श्रद्धालु केवल बाहर से ही दर्शन करने को मजबूर रहते हैं। आरटीआई में मंदिर समिति ने नहीं दी जानकारी
21 जुलाई को इंदौर विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष द्वारा जबरन महाकाल मंदिर में प्रवेश करने के मामले के बाद, दर्पण अवस्थी ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और देशभर से आने वाले भक्तों को गर्भगृह में दर्शन की अनुमति दिलाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनके वकील चर्चित शास्त्री ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के माध्यम से महाकाल मंदिर समिति से यह जानकारी मांगी कि नेता, अधिकारी और अन्य प्रभावशाली लोगों को गर्भगृह में प्रवेश किसके आदेश पर दिया जाता है, लेकिन समिति ने किसी भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया। याचिका में मांग- शुल्क निर्धारित कर प्रवेश शुरू करे
महाकालेश्वर ज्योतिलिंग के गर्भगृह में प्रवेश पर लगी रोक को लेकर लगी याचिका में मांग की गई है कि वीआईपी के नाम पर गर्भगृह में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाए। ऐसी नीति बनाई जाए जिसके तहत आम भक्त भी गर्भगृह में जाकर बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें। भले ही इसके लिए शुल्क निर्धारित कर दिया जाए। महापौर ने दिखाया रास्ता तो लगाई याचिका
याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने बताया कि 8 महीने महाकाल मंदिर गया था, वहां देखा कि आम भक्त पीछे से दर्शन कर रहे हैं। वीआईपी लोग गर्भगृह से दर्शन कर रहे थे। उन्होंने इस स्थिति का वीडियो बनाकर शेयर किया, जिसे लगभग एक मिलियन से अधिक लोग देख चुके हैं। अवस्थी ने कहा कि उन्होंने कई राजनैतिक हस्तियों से संपर्क किया, लेकिन किसी से मदद नहीं मिली। इंदौर महापौर पुष्य मित्र भार्गव ने उन्हें सलाह दी कि इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाएं। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इस खबर पर आप अपनी राय यहां दे सकते हैं। ये खबर भी पढ़ें… फिर टूटा महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश का नियम एक आईपीएस सहित दो डिप्टी कलेक्टर और करीब 9 अधिकारियों सहित सैकड़ों कर्मचारी की तैनाती के बाद भी एक बार फिर महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के नियम तोड़े गए। मामला सोमवार दोपहर का है। कल्याणी समूह के प्रमुख अरबपति व्यवसायी बाबा साहेब नीलकंठ कल्याणी और उनकी पत्नी ने बिना अनुमति के गर्भगृह में प्रवेश कर करीब 10 मिनट तक पूजन अर्चन किया। पूरी खबर पढ़ें…