पंजाब के अमृतसर के लोहगढ़ इलाके में एक मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया। यहां एक दादा अपने पोते को रस्सियों और संगलियों से बंधा कर रिक्शे में स्कूल ले जा रहा था, जबकि बच्चा आंखों से देख नहीं सकता था। राह चलते लोग बच्चे की हालत देखकर स्तब्ध रह गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्चा जोर-जोर से रो रहा था और मदद के लिए गुहार लगा रहा था। स्थानीय समाजसेवक शिवम मेहता ने यह दृश्य देखकर तुरंत रिक्शे का पीछा किया और पुलिस को सूचित किया। पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चे को रस्सियों से आजाद करवा लिया। दादा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बच्चा पिछले तीन महीनों से स्कूल नहीं जा रहा था और बार-बार कहने पर बहाने बनाता था। इस घटना से स्थानीय लोगों में रोष फैल गया। पुलिस को आना पड़ा बीच-बचाव के लिए
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दादा को सख्त चेतावनी दी। उसे समझाया कि दोबारा ऐसा न किया जाए। शर्त पर लिखित आश्वासन लेने के बाद पुलिस ने बच्चे को दोबारा उसके दादा के हवाले कर दिया।
पंजाब के अमृतसर के लोहगढ़ इलाके में एक मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया। यहां एक दादा अपने पोते को रस्सियों और संगलियों से बंधा कर रिक्शे में स्कूल ले जा रहा था, जबकि बच्चा आंखों से देख नहीं सकता था। राह चलते लोग बच्चे की हालत देखकर स्तब्ध रह गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्चा जोर-जोर से रो रहा था और मदद के लिए गुहार लगा रहा था। स्थानीय समाजसेवक शिवम मेहता ने यह दृश्य देखकर तुरंत रिक्शे का पीछा किया और पुलिस को सूचित किया। पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चे को रस्सियों से आजाद करवा लिया। दादा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बच्चा पिछले तीन महीनों से स्कूल नहीं जा रहा था और बार-बार कहने पर बहाने बनाता था। इस घटना से स्थानीय लोगों में रोष फैल गया। पुलिस को आना पड़ा बीच-बचाव के लिए
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दादा को सख्त चेतावनी दी। उसे समझाया कि दोबारा ऐसा न किया जाए। शर्त पर लिखित आश्वासन लेने के बाद पुलिस ने बच्चे को दोबारा उसके दादा के हवाले कर दिया।