सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके सरनेम से संबोधित करने पर एक वकील को फटकार लगाई। दरअसल, वकील मैथ्यूज नेदुम्परा जस्टिस वर्मा को सिर्फ वर्मा कहकर संबोधित कर रहे थे। इस पर चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई ने कहा, ‘क्या वे आपके दोस्त हैं? वे अब भी जस्टिस वर्मा हैं। आप उन्हें कैसे संबोधित करते हैं? थोड़ी मर्यादा रखिए। आप एक विद्वान जज की बात कर रहे हैं। वे अब भी कोर्ट के जज हैं।’ वकील ने जवाब दिया, ‘मुझे नहीं लगता कि उन्हें इतनी इज्जत देनी चाहिए।’ इस पर CJI ने कहा, ‘प्लीज, कोर्ट को ऑर्डर मत दीजिए।’ कोर्ट ने कैश कांड मामले में वकील मैथ्यूज नेदुम्परा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। दूसरी तरफ, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही भी शुरू हो गई है। जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए 152 सांसदों ने आज लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन सौंपा। राज्यसभा में 50 से ज्यादा सांसदों ने प्रस्ताव पर साइन किए। महाभियोग प्रस्ताव को BJP, कांग्रेस और अन्य दलों का समर्थन
महाभियोग प्रस्ताव को भाजपा, कांग्रेस, टीडीपी, जेडीयू, सीपीएम और अन्य दलों के सांसदों का समर्थन मिला। साइन करने वालों में सांसद अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, केसी वेणुगोपाल और पीपी चौधरी शामिल हैं। आजादी के बाद भारत में पहली बार संसद में संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत किसी हाई कोर्ट के सिटिंग जज के खिलाफ महाभियोग की जांच की जाएगी। महाभियोग सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी जस्टिस को पद से हटाने की प्रक्रिया है। भारत में किसी जस्टिस को राष्ट्रपति के आदेश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता। राष्ट्रपति के आदेश के बाद संसद की सहमति जरूरी होती है। महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इस पर कम से कम 50 राज्यसभा सांसदों या 100 लोकसभा सांसदों के साइन जरूरी हैं। प्रस्ताव को स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह फैसला अध्यक्ष या सभापति करते हैं। जस्टिस वर्मा के घर में आग के बाद बेहिसाब कैश मिला था जस्टिस वर्मा के लुटियंस स्थित बंगले पर 14 मार्च की रात आग लगी थी। इसे अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने बुझाया था। घटना के वक्त जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे। 21 मार्च को कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि जस्टिस वर्मा के घर से 15 करोड़ कैश मिला था। काफी नोट जल गए थे। घटना के कई वीडियो भी सामने आए। इसमें जस्टिस के घर के स्टोर रूम से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे दिखे। जस्टिस वर्मा उस समय दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस थे। बाद में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था। CJI की बनाई कमेटी ने जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया
22 मार्च को तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई। पैनल ने 4 मई को CJI को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया था। रिपोर्ट के आधार पर ‘इन-हाउस प्रोसीजर’ के तहत पूर्व CJI खन्ना ने 8 मई सरकार से जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश की थी। जांच समिति में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधवालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज जस्टिस अनु शिवरामन थीं। जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का स्टोर रूम पर कंट्रोल था
कैश कांड की जांच कर रहे सुप्रीम कोर्ट के पैनल की रिपोर्ट 19 जून को सामने आई थी। 64 पेज की रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का स्टोर रूम पर सीक्रेट या एक्टिव कंट्रोल था। 10 दिनों तक चली जांच में 55 गवाहों से पूछताछ हुई और जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास का दौरा किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि आरोपों में पर्याप्त तथ्य हैं। आरोप इतने गंभीर हैं कि जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पूर्व CJI खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की थी। जस्टिस वर्मा ने SC में इंटरनल जांच कमेटी की रिपोर्ट को चुनौती दी
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने इन-हाउस कमेटी की रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश रद्द करने का अनुरोध किया। जस्टिस वर्मा ने कहा कि उनके आवास के बाहरी हिस्से में नकदी बरामद होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वे इसमें शामिल हैं। क्योंकि आंतरिक जांच समिति ने यह तय नहीं किया कि नकदी किसकी है या परिसर में कैसे मिली। पूरी खबर पढ़ें… ……………………………….. जस्टिस वर्मा से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… उपराष्ट्रपति बोले- जस्टिस वर्मा केस में तुरंत FIR की जरूरत:कैश कहां से आया, ये जानना जरूरी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जस्टिस वर्मा के घर में मिले अधजले नोटों के मामले में तुरंत FIR की बात कही। उन्होंने कहा- यह न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह हमारी न्यायपालिका की नींव को हिला देने वाला है। इस मामले की जड़ तक जाने की जरूरत है। कैश कहां से आया, ये जानना बहुत जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें… CJI खन्ना ने जस्टिस वर्मा से इस्तीफा मांगा था:नहीं दिया तो पद से हटाने की सिफारिश की पूर्व CJI संजीव खन्ना ने इनहाउस रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस यशवंत वर्मा को इस्तीफा देने के लिए कहा था। इसके लिए राजी ने होने पर CJI खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश की थी। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों ने हवाले से यह जानकारी दी है। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके सरनेम से संबोधित करने पर एक वकील को फटकार लगाई। दरअसल, वकील मैथ्यूज नेदुम्परा जस्टिस वर्मा को सिर्फ वर्मा कहकर संबोधित कर रहे थे। इस पर चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई ने कहा, ‘क्या वे आपके दोस्त हैं? वे अब भी जस्टिस वर्मा हैं। आप उन्हें कैसे संबोधित करते हैं? थोड़ी मर्यादा रखिए। आप एक विद्वान जज की बात कर रहे हैं। वे अब भी कोर्ट के जज हैं।’ वकील ने जवाब दिया, ‘मुझे नहीं लगता कि उन्हें इतनी इज्जत देनी चाहिए।’ इस पर CJI ने कहा, ‘प्लीज, कोर्ट को ऑर्डर मत दीजिए।’ कोर्ट ने कैश कांड मामले में वकील मैथ्यूज नेदुम्परा की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। दूसरी तरफ, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही भी शुरू हो गई है। जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए 152 सांसदों ने आज लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन सौंपा। राज्यसभा में 50 से ज्यादा सांसदों ने प्रस्ताव पर साइन किए। महाभियोग प्रस्ताव को BJP, कांग्रेस और अन्य दलों का समर्थन
महाभियोग प्रस्ताव को भाजपा, कांग्रेस, टीडीपी, जेडीयू, सीपीएम और अन्य दलों के सांसदों का समर्थन मिला। साइन करने वालों में सांसद अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, केसी वेणुगोपाल और पीपी चौधरी शामिल हैं। आजादी के बाद भारत में पहली बार संसद में संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत किसी हाई कोर्ट के सिटिंग जज के खिलाफ महाभियोग की जांच की जाएगी। महाभियोग सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी जस्टिस को पद से हटाने की प्रक्रिया है। भारत में किसी जस्टिस को राष्ट्रपति के आदेश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता। राष्ट्रपति के आदेश के बाद संसद की सहमति जरूरी होती है। महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। इस पर कम से कम 50 राज्यसभा सांसदों या 100 लोकसभा सांसदों के साइन जरूरी हैं। प्रस्ताव को स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह फैसला अध्यक्ष या सभापति करते हैं। जस्टिस वर्मा के घर में आग के बाद बेहिसाब कैश मिला था जस्टिस वर्मा के लुटियंस स्थित बंगले पर 14 मार्च की रात आग लगी थी। इसे अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने बुझाया था। घटना के वक्त जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे। 21 मार्च को कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि जस्टिस वर्मा के घर से 15 करोड़ कैश मिला था। काफी नोट जल गए थे। घटना के कई वीडियो भी सामने आए। इसमें जस्टिस के घर के स्टोर रूम से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे दिखे। जस्टिस वर्मा उस समय दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस थे। बाद में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था। CJI की बनाई कमेटी ने जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया
22 मार्च को तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की इंटरनल जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई। पैनल ने 4 मई को CJI को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया था। रिपोर्ट के आधार पर ‘इन-हाउस प्रोसीजर’ के तहत पूर्व CJI खन्ना ने 8 मई सरकार से जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश की थी। जांच समिति में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधवालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज जस्टिस अनु शिवरामन थीं। जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का स्टोर रूम पर कंट्रोल था
कैश कांड की जांच कर रहे सुप्रीम कोर्ट के पैनल की रिपोर्ट 19 जून को सामने आई थी। 64 पेज की रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों का स्टोर रूम पर सीक्रेट या एक्टिव कंट्रोल था। 10 दिनों तक चली जांच में 55 गवाहों से पूछताछ हुई और जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास का दौरा किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि आरोपों में पर्याप्त तथ्य हैं। आरोप इतने गंभीर हैं कि जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पूर्व CJI खन्ना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की थी। जस्टिस वर्मा ने SC में इंटरनल जांच कमेटी की रिपोर्ट को चुनौती दी
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने इन-हाउस कमेटी की रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश रद्द करने का अनुरोध किया। जस्टिस वर्मा ने कहा कि उनके आवास के बाहरी हिस्से में नकदी बरामद होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वे इसमें शामिल हैं। क्योंकि आंतरिक जांच समिति ने यह तय नहीं किया कि नकदी किसकी है या परिसर में कैसे मिली। पूरी खबर पढ़ें… ……………………………….. जस्टिस वर्मा से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… उपराष्ट्रपति बोले- जस्टिस वर्मा केस में तुरंत FIR की जरूरत:कैश कहां से आया, ये जानना जरूरी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जस्टिस वर्मा के घर में मिले अधजले नोटों के मामले में तुरंत FIR की बात कही। उन्होंने कहा- यह न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह हमारी न्यायपालिका की नींव को हिला देने वाला है। इस मामले की जड़ तक जाने की जरूरत है। कैश कहां से आया, ये जानना बहुत जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें… CJI खन्ना ने जस्टिस वर्मा से इस्तीफा मांगा था:नहीं दिया तो पद से हटाने की सिफारिश की पूर्व CJI संजीव खन्ना ने इनहाउस रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस यशवंत वर्मा को इस्तीफा देने के लिए कहा था। इसके लिए राजी ने होने पर CJI खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश की थी। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों ने हवाले से यह जानकारी दी है। पूरी खबर पढ़ें…