मध्यप्रदेश में एक गैंग सेल्स टैक्स टीम बनकर मुंबई-आगरा हाईवे पर ट्रक ड्राइवरों से वसूली कर रही है। इस गिरोह में फर्जी उड़नदस्ता भी है और फर्जी अफसर-कर्मचारी भी। ट्रक ड्राइवरों को रोककर ये कागजात चेक करते हैं और फिर वसूली। दैनिक भास्कर टीम ने जान जोखिम में डालकर इस गिरोह को एक्सपोज किया है। इस दौरान गिरोह ने पहले तो भास्कर टीम को सेटिंग का ऑफर दिया, मना किया तो एक गाड़ी को पीछे लगा दिया। इसमें बैठे लोगों के हाथों में लाठियां और हथियार थे। पुलिस को सूचना दी लेकिन जब कोई नहीं आया तो बचने के लिए रिपोर्टर को थाने पहुंचना पड़ा। दरअसल, मध्यप्रदेश सरकार ने अवैध वसूली रोकने के लिए पिछले साल आरटीओ चेक पोस्ट बंद कर दिए लेकिन अवैध वसूली का प्राइवेट सिस्टम शुरू हो गया है। दैनिक भास्कर ने इसे एक्सपोज करने के लिए 20 दिन तक पड़ताल की। गिरोह के नेटवर्क को समझा और इसके सदस्यों को रंगे हाथों वसूली करते पकड़ा। हाईवे पर किस तरह से चल रहा है अवैध वसूली का ये खेल…पढ़िए, रिपोर्ट वसूली का सिस्टम दो तरीके से काम करता है… 1. गिरोह ट्रकों को रोकता है, फिर होटल में डील 2. होटल के एसी रूम में बैठकर करते हैं वसूली अब जानिए, भास्कर ने कैसे एक्सपोज किया गिरोह को स्कॉर्पियो को रोका तो ड्राइवर ने दौड़ लगा दी
भास्कर की टीम ने देखा कि स्कॉर्पियो और आर्टिगा, ट्रक ड्राइवरों को पटेल होटल में भेजकर वापस हाईवे पर अगले शिकार की तलाश में खड़ी हो जाती थीं। टीम ने दो से तीन बार रेकी करने के बाद स्कॉर्पियो में बैठे लोगों से बात करने की कोशिश की। गाड़ी में बैठे लोगों ने जैसे ही भास्कर रिपोर्टर और कैमरामैन को देखा, ड्राइवर ने गाड़ी हाईवे पर दौड़ा दी। भास्कर की टीम ने गाड़ी का पीछा किया लेकिन वह सेंधवा की तरफ भाग गई। होटल में बैठे फर्जी अधिकारी कैमरा देख खेतों में भागे
इसके बाद भास्कर की टीम पटेल होटल पहुंची। यहां रेस्टोरेंट में सेल्स टैक्स के फर्जी अधिकारी बनकर दो युवक बैठे हुए थे। उन्हें स्कॉर्पियो में बैठे लोगों ने कॉल कर भास्कर टीम के बारे में आगाह कर दिया था। टीम को देखकर दोनों बाहर की तरफ भागे। भास्कर रिपोर्टर ने एक युवक का पीछा किया तो वो होटल के पीछे खेत की तरफ भागने लगा। करीब 400 मीटर भागने के बाद युवक की सांस फूलने लगी। रिपोर्टर ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद रिपोर्टर ने फर्जी अधिकारी बने युवक से पूछा तो उसने गोलमोल जवाब देकर रिपोर्टर को गुमराह करने की कोशिश की। रिपोर्टर: रुको रुको…, कहां भाग रहे हो? (200 मीटर दौड़ने के बाद वसूली टीम का सदस्य रुका) फर्जी अफसर: हां बोलो… रिपोर्टर: भाग क्यों रहे थे? फर्जी अफसर: मैंने समझा पुलिस है। रिपोर्टर: कोई अपराध किया है क्या? फर्जी अफसर: नहीं, बकरे की गाड़ी पर था। पुलिस रोक लेती है। रिपोर्टर: नाम क्या है? फर्जी अफसर: आप कौन हो? रिपोर्टर: हम भास्कर से हैं। अपना नाम बताओ और कहां से हो? फर्जी अफसर: रवि श्रीकांत, नीमच से। रिपोर्टर: हमें सेंधवा बताया था। फर्जी अफसर: नीमच से हूं, काम बताओ। रिपोर्टर: कौन सी बकरों की गाड़ी पर हो? फर्जी अफसर: जो सामने खड़ी है। रिपोर्टर: चलो गाड़ी वाले के पास। जब फर्जी अफसर को बकरे की गाड़ी के पास लेकर आए और ड्राइवर से पूछा तो उसने कहा- मैं इन्हें नहीं जानता। गिरोह का भास्कर रिपोर्टर को ऑफर- पत्रकारिता करनी है या धंधा
रवि श्रीकांत नाम के युवक को साथ लेकर टीम वापस होटल लौटी। यहां दो और लोग बैठकर चाय पी रहे थे। ये फर्जी अधिकारियों के ही साथी थे। इन्होंने भास्कर रिपोर्टर से डील करने की कोशिश की। इनसे हुई पूरी बातचीत को रिपोर्टर ने रिकॉर्ड किया और उन्हीं के मुंह से सच उगलवाने की कोशिश की। रिपोर्टर: सेल्स टैक्स अधिकारी बनकर वसूली कर रहे हो, ये तो गलत है। फर्जी अफसर: ये तो यहां सबको पता है। आप हमारा कुछ नहीं कर पाओगे। आप बताओ, करना क्या है? आपके पास सारे फुटेज हैं। अब इसका हल क्या है? रिपोर्टर: कोई हल नहीं है। आप तो सारी बात बताओ। किससे आप लोगों की सेटिंग है? फर्जी अफसर: आपको जो चाहिए, क्लियर बोल दो। हम बैठकर बात कर लेंगे। अगर आप वीडियो रिकॉर्ड करके कैमरे के सामने बात करोगे तो हम बात नहीं करेंगे। हमारे सारे सबूत आपके पास हैं। हमें कोई दिक्कत नहीं है। आप तो बताएं कि मामला शांत कैसे करें? रिपोर्टर: कब से काम कर रहे हो? कितनी गाड़ियां हैं? फर्जी अफसर: अभी 15-20 दिन पहले काम शुरू किया है। आज एक ही गाड़ी है। ज्यादा गाड़ी रखने में खर्च बहुत आता है, इतनी इनकम भी नहीं है। रिपोर्टर: आप कितने लोग हो, कैसे करते हो? फर्जी अफसर: पहले आकर बात करते तो सब बताते, लेकिन आपने तो ऐसा काम किया जैसे कोई अधिकारी हो। कोई छापा मार रहे हो। अगर बात करनी होती तो आप बैठकर करते। अब कोई बात नहीं करेंगे। अगर हम यहां से चले गए, तो हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते। ऐसा कहकर दोनों आगे निकल गए। फिर बोले- अगर कोई बात करनी है तो मोबाइल रखकर करो। डील नहीं हुई तो हथियारों के साथ गुर्गों ने भास्कर टीम का पीछा किया
गिरोह के सदस्यों ने भास्कर रिपोर्टर से ले-देकर मामला खत्म करने की पूरी कोशिश की। साथ में ये भी जताते रहे कि यदि मामले का खुलासा हो भी गया तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसी दौरान उनमें से एक ने स्कॉर्पियो में बैठे लोगों को भास्कर की टीम की गाड़ी का नंबर बता दिया था। टीम जैसे ही पटेल होटल से बाहर निकली, तो स्कॉर्पियो ने टीम की गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। स्कॉर्पियो में बैठे लोगों के हाथों में लाठियां और हथियार थे। पटेल होटल के पास वाले कट से ठीकरी पुलिस थाने की दूरी 10 किमी है। स्कॉर्पियो करीब 8 किमी तक हमारा पीछा करती रही। टीआई ने कॉल रिसीव नहीं किए तो बचने के लिए भास्कर टीम थाने पहुंची
जिस समय भास्कर रिपोर्टर अवैध वसूली करने वाले गिरोह के लोगों से बात कर रहा था, उसी दौरान सुबह 10:26 बजे टीम के दूसरे साथी ने जुलवानिया टीआई राजकुमार को मोबाइल पर कॉल कर सूचना दी थी और पूरा मामला बता दिया था। टीआई ने बताया कि पटेल होटल ठीकरी थाना क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा था कि वो ठीकरी थाने के टीआई ओमप्रकाश चौकड़े को जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने ठीकरी टीआई का नंबर भी शेयर किया। इसके बाद जब भास्कर की टीम होटल से निकली और स्कॉर्पियो ने टीम की गाड़ी का पीछा करना शुरू किया तो रिपोर्टर ने ठीकरी थाने के टीआई को 11:26 और 11:32 बजे कॉल किया, मगर उन्होंने रिसीव ही नहीं किया। भास्कर रिपोर्टर ने बड़वानी एसपी जगदीश डावर को 10:34 बजे और एसडीओपी अजय वाघमारे को 10:28 बजे कॉल किया तो उन्होंने कहा कि ठीकरी के एसडीओपी को कॉल करो। ये मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। फिर टीम ने एसडीओपी दिनेश चौहान को 10:25, 10:26 और 10:27 बजे कॉल किया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद भी जब पुलिस नहीं पहुंची तो करीब 12 बजे स्कॉर्पियो से पीछा छुड़ाने के लिए भास्कर की टीम ने ठीकरी थाने ले जाकर ही गाड़ी खड़ी कर दी। गिरोह के लोगों ने जब ये देखा तो वे सेंधवा की तरफ चले गए। टीआई बोले- सिपाही भेजकर कार्रवाई करता हूं
दैनिक भास्कर की टीम जब थाने पहुंची तो थाना प्रभारी ओमप्रकाश चौकड़े अपनी कुर्सी पर बैठकर आराम से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उनका मोबाइल हाथ में ही था। रिपोर्टर : हम इतनी देर से कॉल कर रहे हैं, आपने रिस्पॉन्स ही नहीं दिया। टीआई: मैं स्नान कर रहा था। रिपोर्टर: स्नान करने में आपको दो घंटे लग गए। टीआई : स्नान करने के बाद मेहमान आ गए थे। रिपोर्टर: आप जनसेवक हैं। मिस कॉल देखने के बाद कॉलबैक नहीं करते? टीआई: रात में ही एक मामले में आरोपियों को पकड़ा था। सुबह से उनकी कार्रवाई करने में लगा था। रिपोर्टर: आपको पता है, आपके थाना इलाके में फर्जी सेल्स टैक्स अफसर बनकर गिरोह वसूली कर रहा है? टीआई: नहीं, हमारे पास ऐसी जानकारी नहीं है। रिपोर्टर: गिरोह के सदस्यों ने बताया कि पुलिस उनके साथ है। सबका हिस्सा बंटा हुआ है। टीआई: ऐसी कोई बात नहीं है, यह गलत है। रिपोर्टर: अब आप उन पर क्या कार्रवाई करेंगे? टीआई: हम आरक्षकों को भेज रहे हैं। छह चेहरे सामने आए, एक का काम को-ऑर्डिनेशन का
भास्कर इन्वेस्टिगेशन में छह चेहरे सामने आए। इनमें दो होटल से जुड़े लोग हैं और चार अन्य ट्रक ड्राइवरों से सीधे अवैध वसूली कर रहे हैं। गिरोह के मुखिया का चेहरा कैमरे में कैद नहीं हो पाया। उससे भास्कर रिपोर्टर की फोन पर बात हुई। 7 पॉइंट्स में जानिए, भास्कर ने कैसे किया इन्वेस्टिगेशन भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबर भी पढ़ें… माफिया ने जंगल में बनाई अवैध शराब की पोर्टेबल फैक्ट्री दमोह जिले के पथरिया में खेतों में नकली शराब बनाई जा रही है। ये शराब दमोह के अलावा छतरपुर, सागर और पन्ना समेत 12 से ज्यादा जिलों में सप्लाई हो रही है। नकली शराब बनाने का एक अड्डा दैनिक भास्कर के कैमरे में कैद हुआ है। शराब माफिया से रिपोर्टर ने डील की तो वह भोपाल तक नकली शराब सप्लाई करने के लिए राजी हो गया। पढे़ं पूरी खबर…
मध्यप्रदेश में एक गैंग सेल्स टैक्स टीम बनकर मुंबई-आगरा हाईवे पर ट्रक ड्राइवरों से वसूली कर रही है। इस गिरोह में फर्जी उड़नदस्ता भी है और फर्जी अफसर-कर्मचारी भी। ट्रक ड्राइवरों को रोककर ये कागजात चेक करते हैं और फिर वसूली। दैनिक भास्कर टीम ने जान जोखिम में डालकर इस गिरोह को एक्सपोज किया है। इस दौरान गिरोह ने पहले तो भास्कर टीम को सेटिंग का ऑफर दिया, मना किया तो एक गाड़ी को पीछे लगा दिया। इसमें बैठे लोगों के हाथों में लाठियां और हथियार थे। पुलिस को सूचना दी लेकिन जब कोई नहीं आया तो बचने के लिए रिपोर्टर को थाने पहुंचना पड़ा। दरअसल, मध्यप्रदेश सरकार ने अवैध वसूली रोकने के लिए पिछले साल आरटीओ चेक पोस्ट बंद कर दिए लेकिन अवैध वसूली का प्राइवेट सिस्टम शुरू हो गया है। दैनिक भास्कर ने इसे एक्सपोज करने के लिए 20 दिन तक पड़ताल की। गिरोह के नेटवर्क को समझा और इसके सदस्यों को रंगे हाथों वसूली करते पकड़ा। हाईवे पर किस तरह से चल रहा है अवैध वसूली का ये खेल…पढ़िए, रिपोर्ट वसूली का सिस्टम दो तरीके से काम करता है… 1. गिरोह ट्रकों को रोकता है, फिर होटल में डील 2. होटल के एसी रूम में बैठकर करते हैं वसूली अब जानिए, भास्कर ने कैसे एक्सपोज किया गिरोह को स्कॉर्पियो को रोका तो ड्राइवर ने दौड़ लगा दी
भास्कर की टीम ने देखा कि स्कॉर्पियो और आर्टिगा, ट्रक ड्राइवरों को पटेल होटल में भेजकर वापस हाईवे पर अगले शिकार की तलाश में खड़ी हो जाती थीं। टीम ने दो से तीन बार रेकी करने के बाद स्कॉर्पियो में बैठे लोगों से बात करने की कोशिश की। गाड़ी में बैठे लोगों ने जैसे ही भास्कर रिपोर्टर और कैमरामैन को देखा, ड्राइवर ने गाड़ी हाईवे पर दौड़ा दी। भास्कर की टीम ने गाड़ी का पीछा किया लेकिन वह सेंधवा की तरफ भाग गई। होटल में बैठे फर्जी अधिकारी कैमरा देख खेतों में भागे
इसके बाद भास्कर की टीम पटेल होटल पहुंची। यहां रेस्टोरेंट में सेल्स टैक्स के फर्जी अधिकारी बनकर दो युवक बैठे हुए थे। उन्हें स्कॉर्पियो में बैठे लोगों ने कॉल कर भास्कर टीम के बारे में आगाह कर दिया था। टीम को देखकर दोनों बाहर की तरफ भागे। भास्कर रिपोर्टर ने एक युवक का पीछा किया तो वो होटल के पीछे खेत की तरफ भागने लगा। करीब 400 मीटर भागने के बाद युवक की सांस फूलने लगी। रिपोर्टर ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद रिपोर्टर ने फर्जी अधिकारी बने युवक से पूछा तो उसने गोलमोल जवाब देकर रिपोर्टर को गुमराह करने की कोशिश की। रिपोर्टर: रुको रुको…, कहां भाग रहे हो? (200 मीटर दौड़ने के बाद वसूली टीम का सदस्य रुका) फर्जी अफसर: हां बोलो… रिपोर्टर: भाग क्यों रहे थे? फर्जी अफसर: मैंने समझा पुलिस है। रिपोर्टर: कोई अपराध किया है क्या? फर्जी अफसर: नहीं, बकरे की गाड़ी पर था। पुलिस रोक लेती है। रिपोर्टर: नाम क्या है? फर्जी अफसर: आप कौन हो? रिपोर्टर: हम भास्कर से हैं। अपना नाम बताओ और कहां से हो? फर्जी अफसर: रवि श्रीकांत, नीमच से। रिपोर्टर: हमें सेंधवा बताया था। फर्जी अफसर: नीमच से हूं, काम बताओ। रिपोर्टर: कौन सी बकरों की गाड़ी पर हो? फर्जी अफसर: जो सामने खड़ी है। रिपोर्टर: चलो गाड़ी वाले के पास। जब फर्जी अफसर को बकरे की गाड़ी के पास लेकर आए और ड्राइवर से पूछा तो उसने कहा- मैं इन्हें नहीं जानता। गिरोह का भास्कर रिपोर्टर को ऑफर- पत्रकारिता करनी है या धंधा
रवि श्रीकांत नाम के युवक को साथ लेकर टीम वापस होटल लौटी। यहां दो और लोग बैठकर चाय पी रहे थे। ये फर्जी अधिकारियों के ही साथी थे। इन्होंने भास्कर रिपोर्टर से डील करने की कोशिश की। इनसे हुई पूरी बातचीत को रिपोर्टर ने रिकॉर्ड किया और उन्हीं के मुंह से सच उगलवाने की कोशिश की। रिपोर्टर: सेल्स टैक्स अधिकारी बनकर वसूली कर रहे हो, ये तो गलत है। फर्जी अफसर: ये तो यहां सबको पता है। आप हमारा कुछ नहीं कर पाओगे। आप बताओ, करना क्या है? आपके पास सारे फुटेज हैं। अब इसका हल क्या है? रिपोर्टर: कोई हल नहीं है। आप तो सारी बात बताओ। किससे आप लोगों की सेटिंग है? फर्जी अफसर: आपको जो चाहिए, क्लियर बोल दो। हम बैठकर बात कर लेंगे। अगर आप वीडियो रिकॉर्ड करके कैमरे के सामने बात करोगे तो हम बात नहीं करेंगे। हमारे सारे सबूत आपके पास हैं। हमें कोई दिक्कत नहीं है। आप तो बताएं कि मामला शांत कैसे करें? रिपोर्टर: कब से काम कर रहे हो? कितनी गाड़ियां हैं? फर्जी अफसर: अभी 15-20 दिन पहले काम शुरू किया है। आज एक ही गाड़ी है। ज्यादा गाड़ी रखने में खर्च बहुत आता है, इतनी इनकम भी नहीं है। रिपोर्टर: आप कितने लोग हो, कैसे करते हो? फर्जी अफसर: पहले आकर बात करते तो सब बताते, लेकिन आपने तो ऐसा काम किया जैसे कोई अधिकारी हो। कोई छापा मार रहे हो। अगर बात करनी होती तो आप बैठकर करते। अब कोई बात नहीं करेंगे। अगर हम यहां से चले गए, तो हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते। ऐसा कहकर दोनों आगे निकल गए। फिर बोले- अगर कोई बात करनी है तो मोबाइल रखकर करो। डील नहीं हुई तो हथियारों के साथ गुर्गों ने भास्कर टीम का पीछा किया
गिरोह के सदस्यों ने भास्कर रिपोर्टर से ले-देकर मामला खत्म करने की पूरी कोशिश की। साथ में ये भी जताते रहे कि यदि मामले का खुलासा हो भी गया तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसी दौरान उनमें से एक ने स्कॉर्पियो में बैठे लोगों को भास्कर की टीम की गाड़ी का नंबर बता दिया था। टीम जैसे ही पटेल होटल से बाहर निकली, तो स्कॉर्पियो ने टीम की गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। स्कॉर्पियो में बैठे लोगों के हाथों में लाठियां और हथियार थे। पटेल होटल के पास वाले कट से ठीकरी पुलिस थाने की दूरी 10 किमी है। स्कॉर्पियो करीब 8 किमी तक हमारा पीछा करती रही। टीआई ने कॉल रिसीव नहीं किए तो बचने के लिए भास्कर टीम थाने पहुंची
जिस समय भास्कर रिपोर्टर अवैध वसूली करने वाले गिरोह के लोगों से बात कर रहा था, उसी दौरान सुबह 10:26 बजे टीम के दूसरे साथी ने जुलवानिया टीआई राजकुमार को मोबाइल पर कॉल कर सूचना दी थी और पूरा मामला बता दिया था। टीआई ने बताया कि पटेल होटल ठीकरी थाना क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा था कि वो ठीकरी थाने के टीआई ओमप्रकाश चौकड़े को जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने ठीकरी टीआई का नंबर भी शेयर किया। इसके बाद जब भास्कर की टीम होटल से निकली और स्कॉर्पियो ने टीम की गाड़ी का पीछा करना शुरू किया तो रिपोर्टर ने ठीकरी थाने के टीआई को 11:26 और 11:32 बजे कॉल किया, मगर उन्होंने रिसीव ही नहीं किया। भास्कर रिपोर्टर ने बड़वानी एसपी जगदीश डावर को 10:34 बजे और एसडीओपी अजय वाघमारे को 10:28 बजे कॉल किया तो उन्होंने कहा कि ठीकरी के एसडीओपी को कॉल करो। ये मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। फिर टीम ने एसडीओपी दिनेश चौहान को 10:25, 10:26 और 10:27 बजे कॉल किया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद भी जब पुलिस नहीं पहुंची तो करीब 12 बजे स्कॉर्पियो से पीछा छुड़ाने के लिए भास्कर की टीम ने ठीकरी थाने ले जाकर ही गाड़ी खड़ी कर दी। गिरोह के लोगों ने जब ये देखा तो वे सेंधवा की तरफ चले गए। टीआई बोले- सिपाही भेजकर कार्रवाई करता हूं
दैनिक भास्कर की टीम जब थाने पहुंची तो थाना प्रभारी ओमप्रकाश चौकड़े अपनी कुर्सी पर बैठकर आराम से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उनका मोबाइल हाथ में ही था। रिपोर्टर : हम इतनी देर से कॉल कर रहे हैं, आपने रिस्पॉन्स ही नहीं दिया। टीआई: मैं स्नान कर रहा था। रिपोर्टर: स्नान करने में आपको दो घंटे लग गए। टीआई : स्नान करने के बाद मेहमान आ गए थे। रिपोर्टर: आप जनसेवक हैं। मिस कॉल देखने के बाद कॉलबैक नहीं करते? टीआई: रात में ही एक मामले में आरोपियों को पकड़ा था। सुबह से उनकी कार्रवाई करने में लगा था। रिपोर्टर: आपको पता है, आपके थाना इलाके में फर्जी सेल्स टैक्स अफसर बनकर गिरोह वसूली कर रहा है? टीआई: नहीं, हमारे पास ऐसी जानकारी नहीं है। रिपोर्टर: गिरोह के सदस्यों ने बताया कि पुलिस उनके साथ है। सबका हिस्सा बंटा हुआ है। टीआई: ऐसी कोई बात नहीं है, यह गलत है। रिपोर्टर: अब आप उन पर क्या कार्रवाई करेंगे? टीआई: हम आरक्षकों को भेज रहे हैं। छह चेहरे सामने आए, एक का काम को-ऑर्डिनेशन का
भास्कर इन्वेस्टिगेशन में छह चेहरे सामने आए। इनमें दो होटल से जुड़े लोग हैं और चार अन्य ट्रक ड्राइवरों से सीधे अवैध वसूली कर रहे हैं। गिरोह के मुखिया का चेहरा कैमरे में कैद नहीं हो पाया। उससे भास्कर रिपोर्टर की फोन पर बात हुई। 7 पॉइंट्स में जानिए, भास्कर ने कैसे किया इन्वेस्टिगेशन भास्कर इन्वेस्टिगेशन की ये खबर भी पढ़ें… माफिया ने जंगल में बनाई अवैध शराब की पोर्टेबल फैक्ट्री दमोह जिले के पथरिया में खेतों में नकली शराब बनाई जा रही है। ये शराब दमोह के अलावा छतरपुर, सागर और पन्ना समेत 12 से ज्यादा जिलों में सप्लाई हो रही है। नकली शराब बनाने का एक अड्डा दैनिक भास्कर के कैमरे में कैद हुआ है। शराब माफिया से रिपोर्टर ने डील की तो वह भोपाल तक नकली शराब सप्लाई करने के लिए राजी हो गया। पढे़ं पूरी खबर…