‘मदरसा बंद हो चुका था, सारे बच्चे घर जा चुके थे। अधिकारी आए और पूछा कि आप मदरसे में झाड़-फूंक करते हैं? हमने कहा कि सरकार कोई फंड देती नहीं, तो जाहिर है कि हमें पब्लिक से फंड लेना होगा। इसके लिए हम झाड़-फूंक करते हैं। अगर सरकार की तरफ से फंड मिले, तो हम झाड़-फूंक न करें। यह सब पूछने के बाद अधिकारियों ने मदरसे में ताला लगा दिया और कहा कि ऑफिस आइएगा।’ यह कहना है मो. सलमान खान अशरफी का। सलमान भारत-नेपाल सीमा पर बसे बहराइच के रंजीतबोझा गांव में मदरसा चलाते हैं। इनके मदरसे को बहराइच जिला प्रशासन ने सील कर दिया। इसी तरह से 5 मई तक बहराइच में 7, श्रावस्ती में 75, सिद्धार्थनगर में 14 मदरसे सील किए गए। महराजगंज, सिद्धार्थनगर और लखीमपुर खीरी जिले में भी कार्रवाई की जा रही है। दैनिक भास्कर की टीम इस पूरे मामले को कवर करने उत्तर प्रदेश के इन जिलों में पहुंची। पढ़िए खास रिपोर्ट… भारत-नेपाल सीमा पर बसे मदरसे निशाने पर
यूपी में नेपाल सीमा से सटे कुल 7 जिले हैं। इनमें बहराइच, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, पीलीभीत और बलरामपुर शामिल हैं। यूपी सरकार को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि इन जिलों की सीमा से जुड़े गांव में अवैध तरीके से मदरसे खुल रहे हैं। सरकारी जमीनों पर कब्जा हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने फैसला लिया कि इन जिलों में जांच कर करवाई की जाएगी। जो भी अवैध मदरसा होगा, उसे तोड़ा या फिर बंद किया जाएगा। सीएम का आदेश मिलने के बाद इन जिलों के प्रशासन ने 25 अप्रैल से कार्रवाई शुरू कर दी। बंद हुए मदरसों के बारे में जानने के लिए हम सबसे पहले बॉर्डर से जुड़े बहराइच पहुंचे। यहां अब तक 7 मदरसों को बंद किया जा चुका है। बॉर्डर इलाके में 227 जगहों को चिह्नित किया गया। इनमें 63 पहले हटाए जा चुके हैं, बाकी को हटाने का अभियान शुरू हो चुका है। बहराइच का बाबागंज इलाका नेपाल सीमा के रुपैडिहा से करीब 6 किलोमीटर पहले है। यहां 2 मदरसों को सील किया गया है। सबसे पहले हम मदरसा अरबिया इस्लामिया बदरूल उलूम पहुंचे। यहां ताला लगा मिला। आसपास लोगों से बात की तो पता चला कि जो इसे चलाते हैं अब यहां से चले गए हैं। इसमें जो बच्चे पढ़ते थे, उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है। प्राइमरी स्कूल के ठीक सामने है मदरसा
हम बाबागंज कस्बे के अंदर पहुंचे। यहां मदरसा अलजामि अतुल गौसिया मिस्बाहुल उलूम पर भी सरकारी ताला लगा है। मदरसे के ठीक सामने अपर प्राइमरी स्कूल भी है। हमने फोन करके इस मदरसे के सेक्रेटरी शकील अहमद को बुलाया। उनसे इसे सील करने का कारण पूछा। वह कहते हैं- प्रशासन ने साफ-साफ नहीं बताया। उन्होंने कहा, कागज पूरे करिए फिर इसके बाद इसे खोला जाएगा। कागज इसकी जमीन से जुड़ा है। हमने बीच में मदरसे का नाम बदल दिया था, इसलिए भी दिक्कत हुई। शकील आगे कहते हैं- पहले इस मदरसे को हमारे बुजुर्ग चला रहे थे। हम 7-8 सालों से इसे चला रहे हैं। हमारा यह मदरसा करीब 65 साल पुराना है। इस वक्त इसमें 25 बच्चे पढ़ाई करते हैं। हमने कहा कि वह बच्चे अब कहां गए? शकील कहते हैं उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है। बाबागंज में कुल 3 मदरसे और 2 प्राइमरी स्कूल हैं। यहां मुस्लिम आबादी हिंदू आबादी से थोड़ी ज्यादा है। यहां हमने कई लोगों से बातचीत की। यह सवाल भी रखा कि क्या जो बच्चे प्राइमरी स्कूलों में पढ़ते हैं, उन्हें मदरसों में उर्दू नहीं पढ़ाई जाती? एक व्यक्ति कहते हैं- जो लोग प्राइमरी में पढ़ते हैं, उन्हें हम अपने यहां लेते ही नहीं। उन्हें सीधा कह दिया जाता है कि आप प्राइमरी में ही पढ़ाई करिए। मदरसे में झाड़-फूंक करते थे, इसलिए सील हुआ
बाबागंज से हम रंजीतबोझा गांव पहुंचे। यह गांव नेपाल की सीमा से एकदम सटा हुआ है। यहां मदरसा दारूल उलूम गुल्शने सैयद महबूब अशरफ को भी सील किया गया है। इस मदरसे को चलाने वाले मो. सलमान खान अशरफी से हमारी बात हुई। वह कहते हैं- 2016 में हमने मदरसा खोला था। 2017 में सरकार ने मान्यता देने से मना कर दिया। 27 अप्रैल को बहराइच से एक टीम आई। उस वक्त मदरसे के बच्चे जा चुके थे। प्रशासन ने कागज मांगे और फिर कहा कि आप यहां झाड़-फूंक करते हैं। इसके बाद ताला लगाकर चले गए। हमने झाड़-फूंक के बारे में सलमान से पूछा। वह कहते हैं- हां, हम झाड़-फूंक करते हैं, क्योंकि सरकार की तरफ से हमें कोई फंड नहीं मिलता। सरकारी फंड मिलता तो ऐसा नहीं करते। जो पब्लिक झाड़-फूंक के लिए आती, उसे हम वापस कर देते। यहीं खड़े शमशेर अली कहते हैं- पहले बच्चे इधर-उधर घूमते थे। मदरसा खुला तो हमारे बच्चे यहीं आकर तालीम लेते थे। इससे उनके अंदर सुधार हो रहा था। लेकिन, अब इसे बंद कर दिया गया। अब बच्चे बकरी-भेड़ चरा रहे हैं। रंजीतबोझा में प्राइमरी स्कूल भी है, वहां हिंदू कम्युनिटी के बच्चे अधिक हैं। वहीं, मुस्लिम वर्ग के बच्चे मदरसे और प्राइमरी स्कूल में बंट जाते हैं। श्रावस्ती में सरकारी जमीन पर कब्जा, बुलडोजर चला
इसके बाद हम श्रावस्ती की तरफ आगे बढ़े। नवाबगंज एरिया में सिरसिया के अंदर प्रशासन ने 7 जगहों पर बुलडोजर चलाया है। यह जगह नेपाल सीमा से करीब 2 किलोमीटर पहले पड़ती है। प्रशासन की तरफ से कहा गया कि यह सब जमीनें सरकारी हैं। स्थानीय लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। बॉर्डर के एकदम करीब तालाब के किनारे अतिक्रमण को भी तोड़ दिया गया। यहां हमें शिवकुमार वर्मा मिले। शिवकुमार के परिवार ने ही यहां कब्जा कर रखा था। शिवकुमार ने कहा- हम 3-4 साल से यहां साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चला रहे थे। पहले किसी ने कोई ऐतराज नहीं जताया था। 30 अप्रैल को दोपहर में अधिकारी और पुलिस की टीम आई और सब कुछ गिरा दिया। हम यहां खड़े होकर देख रहे थे। यहीं पास के चौराहे पर 3 और अवैध निर्माण गिरा दिए गए। प्रेम कुमार, तिलक राम और प्रहलाद यादव सरकारी जमीन को कब्जाने के लिए यहां घर बना रहे थे। श्रावस्ती में अब तक 75 मदरसे सील
श्रावस्ती में अब तक सबसे ज्यादा 75 मदरसों को सील किया गया है। हम जमुनहा क्षेत्र के फतेहपुर बनगई क्षेत्र में पहुंचे। यहां जमुतुल हुदा मदरसे को भी सील किया गया है। हमने आसपास के लोगों से मदरसे को सील करने की वजह जाननी चाही, लेकिन कोई कुछ बताने को तैयार नहीं हुआ। इस मदरसे को लेकर 2 साल पहले झगड़ा हुआ था। ग्राम सभा के लिए शौचालय बना तो मदरसे के प्रमुख ने दीवार खींचकर उसे मदरसे में कर लिया था। इसके बाद हिंदू नेताओं ने दीवार तोड़ी, तो यह अफवाह फैली कि मदरसे को तोड़ा गया। हालांकि, पुलिस ने समझदारी दिखाई और बड़ी घटना होने से लिया। श्रावस्ती जिले के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र राम के मुताबिक, जिले में 105 मदरसों के पास ही मान्यता है। इस वक्त जिले में 297 मदरसे चल रहे हैं। मतलब, 192 मदरसों के पास मान्यता नहीं है। ऐसे मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। श्रावस्ती जिले के डीएम अजय कुमार द्विवेदी इस वक्त नेपाल सीमा के एकदम करीब वाले गांव में अवैध निर्माण को रोकने के लिए सक्रिय हैं। बॉर्डर से 10 किलोमीटर के एरिया में अब अगर कोई रजिस्ट्री होगी, तो पहले उसकी जांच होगी। इसके बाद ही रजिस्ट्री होगी और निर्माण किया जा सकेगा। विपक्ष कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहा
मदरसों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर मुस्लिम संगठन आंदोलन कर रहे हैं। श्रावस्ती में जमीयत उलमा संगठन ने भिनगा की सपा विधायक इंद्राणी वर्मा के नेतृत्व में डीएम से मुलाकात की। जमीयत उलमा के जिला महासचिव मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी का कहना है कि कई स्थानों पर जांच करने गए एसडीएम ने न तो कोई कागज देखे और न ही कुछ बताया। मदरसे को अवैध बताकर सील कर दिया गया। ऐसी कार्रवाई से बच्चों की तालीम का नुकसान हो रहा। महाराजगंज, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर में भी मदरसे सील
सिद्धार्थनगर जिले में 14 मदरसे और 3 मस्जिदों को अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित किया गया है। नौगढ़ तहसील में 1 मस्जिद और 8 मदरसा है, शोहरतगढ़ तहसील में 2 मस्जिद और 8 मदरसा हैं। इन्हें नोटिस दिया गया है। बलरामपुर जिले में अब तक 20 मदरसों को सील किया गया है। इसी तरह से महाराजगंज में अब तक 9 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बाकी की चिह्नित किया जा रहा। लखीमपुर खीरी में पिछले दिनों दो मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। एक तोड़ा और दूसरा सील किया गया था। पीलीभीत की भी सीमा नेपाल से लगती है। यहां अब तक 7 मदरसों को चिह्नित किया गया है। अब जानिए कार्रवाई के पीछे वजह क्या है?
पिछले महीने केंद्र सरकार ने वक्फ कानून बनाया। इसके बाद सरकारी जमीनों पर बने मदरसों और मस्जिदों को जांचा जाने लगा। जांच में उन जिलों को शामिल किया गया, जो नेपाल की सीमा पर हैं। सीमा से जुड़े इलाकों में अतिक्रमण की शिकायत लंबे वक्त से रही है। 3 महीने पहले श्रावस्ती के ही एक मदरसे में नकली नोट छापते लोग पकड़े गए थे। इसके अलावा केंद्र सरकार समय-समय पर सीमा से जुड़े इलाकों की रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगती रही है। यह कार्रवाई उसका भी एक हिस्सा है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी कहते हैं कि यूपी सरकार मुस्लिम छात्रों के भविष्य को लेकर फिक्रमंद है। जो अवैध मदरसे हैं, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कल पढ़ेंः क्या इंडिया-नेपाल बॉर्डर पर मदरसे-मजार बढ़ रहे? ————————- ये खबर भी पढ़ें… राकेश टिकैत की पगड़ी उछालने वाला उन्हीं का आदमी, पहलगाम हमले पर बयान से विवाद; सपा टिकैत बंधुओं से पश्चिमी यूपी साध रही यूपी के मुजफ्फरनगर में पहलगाम हमले के विरोध में 2 मई को निकली जनाक्रोश रैली में भाकियू नेता राकेश टिकैत के खिलाफ हूटिंग हुई। सिर पर किसी ने एक झंडा मार दिया। धक्का-मुक्की में पगड़ी उछल गई। राकेश और नरेश टिकैत अब इसे इश्यू बना चुके हैं। पगड़ी को पूरे जाट समाज का सम्मान बताते हुए 3 मई को मुजफ्फरनगर के GIC ग्राउंड में किसानों की महापंचायत बुलाई। पढ़ें पूरी खबर
‘मदरसा बंद हो चुका था, सारे बच्चे घर जा चुके थे। अधिकारी आए और पूछा कि आप मदरसे में झाड़-फूंक करते हैं? हमने कहा कि सरकार कोई फंड देती नहीं, तो जाहिर है कि हमें पब्लिक से फंड लेना होगा। इसके लिए हम झाड़-फूंक करते हैं। अगर सरकार की तरफ से फंड मिले, तो हम झाड़-फूंक न करें। यह सब पूछने के बाद अधिकारियों ने मदरसे में ताला लगा दिया और कहा कि ऑफिस आइएगा।’ यह कहना है मो. सलमान खान अशरफी का। सलमान भारत-नेपाल सीमा पर बसे बहराइच के रंजीतबोझा गांव में मदरसा चलाते हैं। इनके मदरसे को बहराइच जिला प्रशासन ने सील कर दिया। इसी तरह से 5 मई तक बहराइच में 7, श्रावस्ती में 75, सिद्धार्थनगर में 14 मदरसे सील किए गए। महराजगंज, सिद्धार्थनगर और लखीमपुर खीरी जिले में भी कार्रवाई की जा रही है। दैनिक भास्कर की टीम इस पूरे मामले को कवर करने उत्तर प्रदेश के इन जिलों में पहुंची। पढ़िए खास रिपोर्ट… भारत-नेपाल सीमा पर बसे मदरसे निशाने पर
यूपी में नेपाल सीमा से सटे कुल 7 जिले हैं। इनमें बहराइच, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, पीलीभीत और बलरामपुर शामिल हैं। यूपी सरकार को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि इन जिलों की सीमा से जुड़े गांव में अवैध तरीके से मदरसे खुल रहे हैं। सरकारी जमीनों पर कब्जा हो रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने फैसला लिया कि इन जिलों में जांच कर करवाई की जाएगी। जो भी अवैध मदरसा होगा, उसे तोड़ा या फिर बंद किया जाएगा। सीएम का आदेश मिलने के बाद इन जिलों के प्रशासन ने 25 अप्रैल से कार्रवाई शुरू कर दी। बंद हुए मदरसों के बारे में जानने के लिए हम सबसे पहले बॉर्डर से जुड़े बहराइच पहुंचे। यहां अब तक 7 मदरसों को बंद किया जा चुका है। बॉर्डर इलाके में 227 जगहों को चिह्नित किया गया। इनमें 63 पहले हटाए जा चुके हैं, बाकी को हटाने का अभियान शुरू हो चुका है। बहराइच का बाबागंज इलाका नेपाल सीमा के रुपैडिहा से करीब 6 किलोमीटर पहले है। यहां 2 मदरसों को सील किया गया है। सबसे पहले हम मदरसा अरबिया इस्लामिया बदरूल उलूम पहुंचे। यहां ताला लगा मिला। आसपास लोगों से बात की तो पता चला कि जो इसे चलाते हैं अब यहां से चले गए हैं। इसमें जो बच्चे पढ़ते थे, उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है। प्राइमरी स्कूल के ठीक सामने है मदरसा
हम बाबागंज कस्बे के अंदर पहुंचे। यहां मदरसा अलजामि अतुल गौसिया मिस्बाहुल उलूम पर भी सरकारी ताला लगा है। मदरसे के ठीक सामने अपर प्राइमरी स्कूल भी है। हमने फोन करके इस मदरसे के सेक्रेटरी शकील अहमद को बुलाया। उनसे इसे सील करने का कारण पूछा। वह कहते हैं- प्रशासन ने साफ-साफ नहीं बताया। उन्होंने कहा, कागज पूरे करिए फिर इसके बाद इसे खोला जाएगा। कागज इसकी जमीन से जुड़ा है। हमने बीच में मदरसे का नाम बदल दिया था, इसलिए भी दिक्कत हुई। शकील आगे कहते हैं- पहले इस मदरसे को हमारे बुजुर्ग चला रहे थे। हम 7-8 सालों से इसे चला रहे हैं। हमारा यह मदरसा करीब 65 साल पुराना है। इस वक्त इसमें 25 बच्चे पढ़ाई करते हैं। हमने कहा कि वह बच्चे अब कहां गए? शकील कहते हैं उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है। बाबागंज में कुल 3 मदरसे और 2 प्राइमरी स्कूल हैं। यहां मुस्लिम आबादी हिंदू आबादी से थोड़ी ज्यादा है। यहां हमने कई लोगों से बातचीत की। यह सवाल भी रखा कि क्या जो बच्चे प्राइमरी स्कूलों में पढ़ते हैं, उन्हें मदरसों में उर्दू नहीं पढ़ाई जाती? एक व्यक्ति कहते हैं- जो लोग प्राइमरी में पढ़ते हैं, उन्हें हम अपने यहां लेते ही नहीं। उन्हें सीधा कह दिया जाता है कि आप प्राइमरी में ही पढ़ाई करिए। मदरसे में झाड़-फूंक करते थे, इसलिए सील हुआ
बाबागंज से हम रंजीतबोझा गांव पहुंचे। यह गांव नेपाल की सीमा से एकदम सटा हुआ है। यहां मदरसा दारूल उलूम गुल्शने सैयद महबूब अशरफ को भी सील किया गया है। इस मदरसे को चलाने वाले मो. सलमान खान अशरफी से हमारी बात हुई। वह कहते हैं- 2016 में हमने मदरसा खोला था। 2017 में सरकार ने मान्यता देने से मना कर दिया। 27 अप्रैल को बहराइच से एक टीम आई। उस वक्त मदरसे के बच्चे जा चुके थे। प्रशासन ने कागज मांगे और फिर कहा कि आप यहां झाड़-फूंक करते हैं। इसके बाद ताला लगाकर चले गए। हमने झाड़-फूंक के बारे में सलमान से पूछा। वह कहते हैं- हां, हम झाड़-फूंक करते हैं, क्योंकि सरकार की तरफ से हमें कोई फंड नहीं मिलता। सरकारी फंड मिलता तो ऐसा नहीं करते। जो पब्लिक झाड़-फूंक के लिए आती, उसे हम वापस कर देते। यहीं खड़े शमशेर अली कहते हैं- पहले बच्चे इधर-उधर घूमते थे। मदरसा खुला तो हमारे बच्चे यहीं आकर तालीम लेते थे। इससे उनके अंदर सुधार हो रहा था। लेकिन, अब इसे बंद कर दिया गया। अब बच्चे बकरी-भेड़ चरा रहे हैं। रंजीतबोझा में प्राइमरी स्कूल भी है, वहां हिंदू कम्युनिटी के बच्चे अधिक हैं। वहीं, मुस्लिम वर्ग के बच्चे मदरसे और प्राइमरी स्कूल में बंट जाते हैं। श्रावस्ती में सरकारी जमीन पर कब्जा, बुलडोजर चला
इसके बाद हम श्रावस्ती की तरफ आगे बढ़े। नवाबगंज एरिया में सिरसिया के अंदर प्रशासन ने 7 जगहों पर बुलडोजर चलाया है। यह जगह नेपाल सीमा से करीब 2 किलोमीटर पहले पड़ती है। प्रशासन की तरफ से कहा गया कि यह सब जमीनें सरकारी हैं। स्थानीय लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। बॉर्डर के एकदम करीब तालाब के किनारे अतिक्रमण को भी तोड़ दिया गया। यहां हमें शिवकुमार वर्मा मिले। शिवकुमार के परिवार ने ही यहां कब्जा कर रखा था। शिवकुमार ने कहा- हम 3-4 साल से यहां साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चला रहे थे। पहले किसी ने कोई ऐतराज नहीं जताया था। 30 अप्रैल को दोपहर में अधिकारी और पुलिस की टीम आई और सब कुछ गिरा दिया। हम यहां खड़े होकर देख रहे थे। यहीं पास के चौराहे पर 3 और अवैध निर्माण गिरा दिए गए। प्रेम कुमार, तिलक राम और प्रहलाद यादव सरकारी जमीन को कब्जाने के लिए यहां घर बना रहे थे। श्रावस्ती में अब तक 75 मदरसे सील
श्रावस्ती में अब तक सबसे ज्यादा 75 मदरसों को सील किया गया है। हम जमुनहा क्षेत्र के फतेहपुर बनगई क्षेत्र में पहुंचे। यहां जमुतुल हुदा मदरसे को भी सील किया गया है। हमने आसपास के लोगों से मदरसे को सील करने की वजह जाननी चाही, लेकिन कोई कुछ बताने को तैयार नहीं हुआ। इस मदरसे को लेकर 2 साल पहले झगड़ा हुआ था। ग्राम सभा के लिए शौचालय बना तो मदरसे के प्रमुख ने दीवार खींचकर उसे मदरसे में कर लिया था। इसके बाद हिंदू नेताओं ने दीवार तोड़ी, तो यह अफवाह फैली कि मदरसे को तोड़ा गया। हालांकि, पुलिस ने समझदारी दिखाई और बड़ी घटना होने से लिया। श्रावस्ती जिले के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र राम के मुताबिक, जिले में 105 मदरसों के पास ही मान्यता है। इस वक्त जिले में 297 मदरसे चल रहे हैं। मतलब, 192 मदरसों के पास मान्यता नहीं है। ऐसे मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। श्रावस्ती जिले के डीएम अजय कुमार द्विवेदी इस वक्त नेपाल सीमा के एकदम करीब वाले गांव में अवैध निर्माण को रोकने के लिए सक्रिय हैं। बॉर्डर से 10 किलोमीटर के एरिया में अब अगर कोई रजिस्ट्री होगी, तो पहले उसकी जांच होगी। इसके बाद ही रजिस्ट्री होगी और निर्माण किया जा सकेगा। विपक्ष कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहा
मदरसों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर मुस्लिम संगठन आंदोलन कर रहे हैं। श्रावस्ती में जमीयत उलमा संगठन ने भिनगा की सपा विधायक इंद्राणी वर्मा के नेतृत्व में डीएम से मुलाकात की। जमीयत उलमा के जिला महासचिव मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी का कहना है कि कई स्थानों पर जांच करने गए एसडीएम ने न तो कोई कागज देखे और न ही कुछ बताया। मदरसे को अवैध बताकर सील कर दिया गया। ऐसी कार्रवाई से बच्चों की तालीम का नुकसान हो रहा। महाराजगंज, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर में भी मदरसे सील
सिद्धार्थनगर जिले में 14 मदरसे और 3 मस्जिदों को अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित किया गया है। नौगढ़ तहसील में 1 मस्जिद और 8 मदरसा है, शोहरतगढ़ तहसील में 2 मस्जिद और 8 मदरसा हैं। इन्हें नोटिस दिया गया है। बलरामपुर जिले में अब तक 20 मदरसों को सील किया गया है। इसी तरह से महाराजगंज में अब तक 9 मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बाकी की चिह्नित किया जा रहा। लखीमपुर खीरी में पिछले दिनों दो मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। एक तोड़ा और दूसरा सील किया गया था। पीलीभीत की भी सीमा नेपाल से लगती है। यहां अब तक 7 मदरसों को चिह्नित किया गया है। अब जानिए कार्रवाई के पीछे वजह क्या है?
पिछले महीने केंद्र सरकार ने वक्फ कानून बनाया। इसके बाद सरकारी जमीनों पर बने मदरसों और मस्जिदों को जांचा जाने लगा। जांच में उन जिलों को शामिल किया गया, जो नेपाल की सीमा पर हैं। सीमा से जुड़े इलाकों में अतिक्रमण की शिकायत लंबे वक्त से रही है। 3 महीने पहले श्रावस्ती के ही एक मदरसे में नकली नोट छापते लोग पकड़े गए थे। इसके अलावा केंद्र सरकार समय-समय पर सीमा से जुड़े इलाकों की रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगती रही है। यह कार्रवाई उसका भी एक हिस्सा है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी कहते हैं कि यूपी सरकार मुस्लिम छात्रों के भविष्य को लेकर फिक्रमंद है। जो अवैध मदरसे हैं, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कल पढ़ेंः क्या इंडिया-नेपाल बॉर्डर पर मदरसे-मजार बढ़ रहे? ————————- ये खबर भी पढ़ें… राकेश टिकैत की पगड़ी उछालने वाला उन्हीं का आदमी, पहलगाम हमले पर बयान से विवाद; सपा टिकैत बंधुओं से पश्चिमी यूपी साध रही यूपी के मुजफ्फरनगर में पहलगाम हमले के विरोध में 2 मई को निकली जनाक्रोश रैली में भाकियू नेता राकेश टिकैत के खिलाफ हूटिंग हुई। सिर पर किसी ने एक झंडा मार दिया। धक्का-मुक्की में पगड़ी उछल गई। राकेश और नरेश टिकैत अब इसे इश्यू बना चुके हैं। पगड़ी को पूरे जाट समाज का सम्मान बताते हुए 3 मई को मुजफ्फरनगर के GIC ग्राउंड में किसानों की महापंचायत बुलाई। पढ़ें पूरी खबर