सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर के सभी हाईकोर्ट्स से पेंडिंग केसों की जानकारी मांगी। कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट उन केसों की रिपोर्ट जमा करें, जिनमें 31 जनवरी 2025 से पहले फैसला सुरक्षित रखा गया, लेकिन आज तक सुनाया नहीं गया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने कहा- केसों की सुनवाई में होने वाली इस तरह की देरी बेहद परेशान करने वाली है। वक्त पर न्याय मिले। इसके लिए हमें कुछ जरूरी दिशा-निर्देश तय करने होंगे। ऐसा चलता नहीं रह सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। इसमें चार दोषियों ने शिकायत की थी कि उनकी आपराधिक अपीलों पर झारखंड हाईकोर्ट ने 2022 में फैसला सुरक्षित किया था, लेकिन अब तक फाइनल सुनवाई नहीं हुई। झारखंड HC ने हफ्तेभर में 75 केस पर फैसला सुनाया
याचिकाकर्ताओं के वकील फौजिया शकील ने बताया- वर्तमान केस में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने कई मामलों में सुनवाई पूरी की है। हालांकि याचिकाकर्ताओं की अपील पर अब भी फैसला आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा- नोटिस जारी होने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में 75 आपराधिक मामलों पर सुनवाई पूरी की। इसके बाद बेंच ने झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि उन 75 अपीलों की लिस्ट प्रस्तुत करें जिन पर हाल ही में निर्णय हुआ है। यह भी बताएं कि इन मामलों में फैसला कब सुरक्षित किया गया था। जानिए क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट हत्या और रेप के एक मामले में सुनवाई कर रहा था, जिसमें चार मुख्य में से तीन पर हत्या और एक पर रेप का आरोप है। आरोपी अनुसूचित जनजाति और OBC से आते हैं। इन्होंने 2022 में अपनी सजा के खिलाफ आपराधिक अपीलें झारखंड हाईकोर्ट में दायर की थीं। लेकिन करीब 2-3 साल बीतने के बावजूद उन पर फैसला नहीं आया। चार में से एक 16 साल से जेल में है, जबकि अन्य 11-14 वर्षों की सजा काट चुके हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब तक हाईकोर्ट फैसला नहीं सुनाता, वो क्षमा या अन्य राहत के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते। याचिका में तर्क दिया गया है कि हाईकोर्ट का निर्णय ना सुनाना अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल की सीमाएं भी तय कर चुका सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (8 अप्रैल) को ऐतिहासिक फैसले में राज्यपालों के अधिकार की ‘सीमा’ तय कर दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने तमिलनाडु के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा, ‘राज्यपाल के पास कोई वीटो पॉवर नहीं है।’ इससे तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार को बड़ी राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के 10 जरूरी बिलों को राज्यपाल की ओर से रोके जाने को अवैध भी बताया। कोर्ट ने कहा कि यह मनमाना कदम है और कानून के नजरिए से सही नहीं। राज्यपाल को राज्य की विधानसभा को मदद और सलाह देनी चाहिए थी। पूरी खबर पढ़ें… ——————————— सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- रेप पर इलाहाबाद HC की टिप्पणी असंवेदनशील:फैसले पर रोक, हाईकोर्ट ने कहा था- नाबालिग का ब्रेस्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना रेप नहीं सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें HC ने कहा था कि नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे के नाड़े को तोड़ना रेप या अटेम्प्ट टु रेप नहीं है। जस्टिस बीआर गवई और एजी मसीह की बेंच ने बुधवार को इस केस पर सुनवाई की। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर के सभी हाईकोर्ट्स से पेंडिंग केसों की जानकारी मांगी। कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट उन केसों की रिपोर्ट जमा करें, जिनमें 31 जनवरी 2025 से पहले फैसला सुरक्षित रखा गया, लेकिन आज तक सुनाया नहीं गया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने कहा- केसों की सुनवाई में होने वाली इस तरह की देरी बेहद परेशान करने वाली है। वक्त पर न्याय मिले। इसके लिए हमें कुछ जरूरी दिशा-निर्देश तय करने होंगे। ऐसा चलता नहीं रह सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। इसमें चार दोषियों ने शिकायत की थी कि उनकी आपराधिक अपीलों पर झारखंड हाईकोर्ट ने 2022 में फैसला सुरक्षित किया था, लेकिन अब तक फाइनल सुनवाई नहीं हुई। झारखंड HC ने हफ्तेभर में 75 केस पर फैसला सुनाया
याचिकाकर्ताओं के वकील फौजिया शकील ने बताया- वर्तमान केस में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने कई मामलों में सुनवाई पूरी की है। हालांकि याचिकाकर्ताओं की अपील पर अब भी फैसला आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा- नोटिस जारी होने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में 75 आपराधिक मामलों पर सुनवाई पूरी की। इसके बाद बेंच ने झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि उन 75 अपीलों की लिस्ट प्रस्तुत करें जिन पर हाल ही में निर्णय हुआ है। यह भी बताएं कि इन मामलों में फैसला कब सुरक्षित किया गया था। जानिए क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट हत्या और रेप के एक मामले में सुनवाई कर रहा था, जिसमें चार मुख्य में से तीन पर हत्या और एक पर रेप का आरोप है। आरोपी अनुसूचित जनजाति और OBC से आते हैं। इन्होंने 2022 में अपनी सजा के खिलाफ आपराधिक अपीलें झारखंड हाईकोर्ट में दायर की थीं। लेकिन करीब 2-3 साल बीतने के बावजूद उन पर फैसला नहीं आया। चार में से एक 16 साल से जेल में है, जबकि अन्य 11-14 वर्षों की सजा काट चुके हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब तक हाईकोर्ट फैसला नहीं सुनाता, वो क्षमा या अन्य राहत के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते। याचिका में तर्क दिया गया है कि हाईकोर्ट का निर्णय ना सुनाना अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल की सीमाएं भी तय कर चुका सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (8 अप्रैल) को ऐतिहासिक फैसले में राज्यपालों के अधिकार की ‘सीमा’ तय कर दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने तमिलनाडु के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा, ‘राज्यपाल के पास कोई वीटो पॉवर नहीं है।’ इससे तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार को बड़ी राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के 10 जरूरी बिलों को राज्यपाल की ओर से रोके जाने को अवैध भी बताया। कोर्ट ने कहा कि यह मनमाना कदम है और कानून के नजरिए से सही नहीं। राज्यपाल को राज्य की विधानसभा को मदद और सलाह देनी चाहिए थी। पूरी खबर पढ़ें… ——————————— सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- रेप पर इलाहाबाद HC की टिप्पणी असंवेदनशील:फैसले पर रोक, हाईकोर्ट ने कहा था- नाबालिग का ब्रेस्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना रेप नहीं सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें HC ने कहा था कि नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे के नाड़े को तोड़ना रेप या अटेम्प्ट टु रेप नहीं है। जस्टिस बीआर गवई और एजी मसीह की बेंच ने बुधवार को इस केस पर सुनवाई की। पूरी खबर पढ़ें…