सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को श्रीनगर के अहमद तारिक बट्ट के परिवार के 6 सदस्यों को पाकिस्तान डिपोर्ट करने पर रोक लगा दी। कहा- ‘जब तक इन लोगों के आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई नहीं हो जाते, तब तक उनको डिपोर्ट नहीं किया जाए।’ दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने देश में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया था। बट्ट परिवार को भी देश छोड़ने का नोटिस मिला। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने परिवार को यह स्वतंत्रता दी कि यदि वे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन आदेश से खुश नहीं हैं तो जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। कोर्ट ने ये भी कहा है कि इस मामले में दिया कोर्ट का आदेश मिसाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाए। कोर्ट रूम लाइव… बेंच: आपका जन्म पाकिस्तान के मीरपुर में हुआ था, हम जानना चाहते हैं कि आप भारत कैसे और क्यों आए? बट्ट: मैं 1997 में अपने पिता के साथ भारत आया था, उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट था। श्रीनगर पहुंचने पर पिता ने पाकिस्तानी पासपोर्ट जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में जमा कर दिया। फिर भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया, जो मिल गया था। बट्ट: मेरे उनके परिवार के अन्य सदस्य 3 साल बाद यानी 2000 में श्रीनगर पहुंचे थे। मेरी और मेरे-बहन की एजुकेशन भी यहीं से हुई है। सभी के पास भारतीय नागरिकता है, पासपोर्ट है, आधार कार्ड और दूसरे डॉक्यूमेंट्स हैं। सरकार के भेजे नोटिस में झूठा कहा गया है कि हम वीजा पर भारत में आये थे और निर्धारित अवधि से अधिक समय तक यहां रुके थे। 29 अप्रैल तक 786 पाकिस्तानियों ने भारत छोड़ा… 24 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल की शाम 5 बजे तक अटारी-वाघा बॉर्डर के से 786 पाकिस्तानी वापस लौटे। PTI के मुताबिक 28 अप्रैल तक एक हजार से ज्यादा भारतीय पाकिस्तान से स्वदेश लौटे थे। 29 अप्रैल को पाकिस्तानी नागरिकों को जारी मेडिकल वीजा की वैधता भी खत्म हुई। केंद्र सरकार ने 27 अप्रैल को आदेश जारी कर रहा था कि डेडलाइन में भारत नहीं छोड़ने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार कर केस चलाया जाएगा। उन्हें तीन साल जेल या तीन लाख रुपए जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है। भारत सरकार ने 25 अप्रैल को पाकिस्तानी नागरिकों के देश से जाने के आदेश को लेकर नोटिस जारी किया था। इसमें लॉन्ग टर्म, डिप्लोमैट्स और ऑफिशियल वीजा को छोड़कर पाकिस्तानी नागरिकों को जारी सभी तरह के वीजा 27 अप्रैल से रद्द कर दिए थे। 14 कैटेगरी के वीजा रद्द किए गए
इससे पहले भारत सरकार ने 23 अप्रैल को बताया था कि पाकिस्तानी नागरिकों 14 कैटेगरी में दिए गए वीजा रद्द किए गए हैं। 12 कैटेगरीज के वीजाधारकों को 25 अप्रैल, SAARC वीजाधारकों को 26 अप्रैल और मेडिकल वीजा वालों को 29 अप्रैल तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया था। बाद में 12 कैटेगरीज के वीजा होल्डर्स के लिए भारत छोड़ने की समयसीमा बढ़ाकर 27 अप्रैल कर दी गई थी। इसके अलावा पाकिस्तान हाई कमीशन के डिफेंस, नेवी और एयरफोर्स के डिप्लोमैट्स को ‘अन वॉन्टेड पर्सन’ घोषित किया गया है। इन्हें 30 अप्रैल तक भारत छोड़ना होगा। जानिए, वीजा की 14 कैटेगरी… ……………………….. मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… वापस भेजे जा रहे पाकिस्तानी, 5 कहानियां; बच्चों से बिछड़ते हुए रोईं सना, तो मिली राहत भारत सरकार के फैसले से देशभर में कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अपनों से बिछड़ने का दर्द ऐसा कि एक मां को अपने 3 साल के बच्चे को पाकिस्तान भेजना पड़ा। वहीं 35 साल से भारत में रहने वाली एक महिला को अब अपने परिवार बच्चों को छोड़कर पाकिस्तान जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को श्रीनगर के अहमद तारिक बट्ट के परिवार के 6 सदस्यों को पाकिस्तान डिपोर्ट करने पर रोक लगा दी। कहा- ‘जब तक इन लोगों के आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई नहीं हो जाते, तब तक उनको डिपोर्ट नहीं किया जाए।’ दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने देश में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया था। बट्ट परिवार को भी देश छोड़ने का नोटिस मिला। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने परिवार को यह स्वतंत्रता दी कि यदि वे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन आदेश से खुश नहीं हैं तो जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। कोर्ट ने ये भी कहा है कि इस मामले में दिया कोर्ट का आदेश मिसाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाए। कोर्ट रूम लाइव… बेंच: आपका जन्म पाकिस्तान के मीरपुर में हुआ था, हम जानना चाहते हैं कि आप भारत कैसे और क्यों आए? बट्ट: मैं 1997 में अपने पिता के साथ भारत आया था, उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट था। श्रीनगर पहुंचने पर पिता ने पाकिस्तानी पासपोर्ट जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में जमा कर दिया। फिर भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया, जो मिल गया था। बट्ट: मेरे उनके परिवार के अन्य सदस्य 3 साल बाद यानी 2000 में श्रीनगर पहुंचे थे। मेरी और मेरे-बहन की एजुकेशन भी यहीं से हुई है। सभी के पास भारतीय नागरिकता है, पासपोर्ट है, आधार कार्ड और दूसरे डॉक्यूमेंट्स हैं। सरकार के भेजे नोटिस में झूठा कहा गया है कि हम वीजा पर भारत में आये थे और निर्धारित अवधि से अधिक समय तक यहां रुके थे। 29 अप्रैल तक 786 पाकिस्तानियों ने भारत छोड़ा… 24 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल की शाम 5 बजे तक अटारी-वाघा बॉर्डर के से 786 पाकिस्तानी वापस लौटे। PTI के मुताबिक 28 अप्रैल तक एक हजार से ज्यादा भारतीय पाकिस्तान से स्वदेश लौटे थे। 29 अप्रैल को पाकिस्तानी नागरिकों को जारी मेडिकल वीजा की वैधता भी खत्म हुई। केंद्र सरकार ने 27 अप्रैल को आदेश जारी कर रहा था कि डेडलाइन में भारत नहीं छोड़ने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार कर केस चलाया जाएगा। उन्हें तीन साल जेल या तीन लाख रुपए जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है। भारत सरकार ने 25 अप्रैल को पाकिस्तानी नागरिकों के देश से जाने के आदेश को लेकर नोटिस जारी किया था। इसमें लॉन्ग टर्म, डिप्लोमैट्स और ऑफिशियल वीजा को छोड़कर पाकिस्तानी नागरिकों को जारी सभी तरह के वीजा 27 अप्रैल से रद्द कर दिए थे। 14 कैटेगरी के वीजा रद्द किए गए
इससे पहले भारत सरकार ने 23 अप्रैल को बताया था कि पाकिस्तानी नागरिकों 14 कैटेगरी में दिए गए वीजा रद्द किए गए हैं। 12 कैटेगरीज के वीजाधारकों को 25 अप्रैल, SAARC वीजाधारकों को 26 अप्रैल और मेडिकल वीजा वालों को 29 अप्रैल तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया था। बाद में 12 कैटेगरीज के वीजा होल्डर्स के लिए भारत छोड़ने की समयसीमा बढ़ाकर 27 अप्रैल कर दी गई थी। इसके अलावा पाकिस्तान हाई कमीशन के डिफेंस, नेवी और एयरफोर्स के डिप्लोमैट्स को ‘अन वॉन्टेड पर्सन’ घोषित किया गया है। इन्हें 30 अप्रैल तक भारत छोड़ना होगा। जानिए, वीजा की 14 कैटेगरी… ……………………….. मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… वापस भेजे जा रहे पाकिस्तानी, 5 कहानियां; बच्चों से बिछड़ते हुए रोईं सना, तो मिली राहत भारत सरकार के फैसले से देशभर में कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अपनों से बिछड़ने का दर्द ऐसा कि एक मां को अपने 3 साल के बच्चे को पाकिस्तान भेजना पड़ा। वहीं 35 साल से भारत में रहने वाली एक महिला को अब अपने परिवार बच्चों को छोड़कर पाकिस्तान जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…