DRDO ने शुक्रवार को हाइपरसोनिक वेपन टेक्नोलॉजी में बड़ा मुकाम हासिल किया। हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) ने 1,000 सेकेंड से ज्यादा समय तक एक्टिव कूल्ड स्क्रैमजेट सबस्केल कंबस्टर का ग्राउंड टेस्ट किया। यह टेस्ट DRDO की स्टेट ऑफ आर्ट एडवांस सेंटर (स्क्रैमजेट कनेक्ट टेस्ट फैसिलिटी) में किया गया। इससे पहले जनवरी 2025 में भी इसी इंजन का 120 सेकेंड का सफल टेस्ट हुआ था। अब 1,000 सेकेंड के इस टेस्ट के बाद यह सिस्टम फुल-स्केल उड़ान के लिए तैयार माना जा रहा है। INS सूरत से 24 अप्रैल को मिसाइल की टेस्टिंग नेवी ने INS सूरत से 24 मार्च को मिसाइल की टेस्टिंग की। नेवी ने समुद्र में तैर रहे एक छोटे टारगेट को नष्ट किया। गुजरात के सूरत में दमन सी फेस पर INS सूरत तैनात है। यह युद्धपोत 164 मीटर लंबा और 7,400 टन वजनी है। इसकी अधिकतम गति 30 नॉट्स (लगभग 56 किमी/घंटा) है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों- ब्रह्मोस और बाराक-8 मिसाइल और AI बेस्ड सेंसर सिस्टम है। सफल टेस्टिंग के लिए रक्षा मंत्री ने DRDO को बधाई दी इस टेस्ट के साथ ही न सिर्फ इंजन डिजाइन की वैलिडेशन है, बल्कि नई टेस्ट फैसिलिटी की भी पहली बड़ी कामयाबी है। रक्षा मंत्रालय ने इसे DRDO, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के सहयोग से हासिल किया गया इंटीग्रेटेड एफर्ट बताया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सभी पार्टनर्स को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की क्रिटिकल हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी को हासिल करने की कमीटमेंट दिखाती है। DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े DG मिसाइल्स यू. राजा बाबू, DRDL डायरेक्टर डॉ. जीए श्रीनिवास मूर्ति और पूरी टीम को बधाई दी। हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत हाइपरसोनिक मिसाइलों पर DRDO लंबे समय से काम कर रहा है भारत भी कई वर्षों से हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में जुटा है। DRDO ने 2020 में एक हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटेड व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत HSTDV का इस्तेमाल करके अपनी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की ओर बढ़ रहा है। साथ ही भारत रूस के सहयोग से ब्रह्मोस-II मिसाइल के विकास में जुटा है, जोकि एक हाइपरसोनिक मिसाइल है। ब्रह्मोस-II की रेंज 1500 किमी तक होगी और स्पीड साउंड से 7-8 गुना ज्यादा (करीब 9000 किमी/घंटे) होगी। इसकी टेस्टिंग 2024 तक होने की उम्मीद है। इनके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देश हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में जुटे हैं। वहीं नॉर्थ कोरिया भी हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने का दावा कर चुका है। —————————————- ये खबर भी पढ़ें … आज का एक्सप्लेनर:भारत लेगा पहलगाम हमले का बदला; क्या ड्रोन, मिसाइल अटैक या बम गिराएगा, जमीनी जंग में कौन-सी अड़चनें उरी में आतंकी घुसे, तो PoK में सर्जिकल स्ट्राइक की। पुलवामा में हमला हुआ, तो बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई। अब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की जान ली, तो भारत ने 5 बड़े कूटनीतिक कदम उठाए हैं, जिसमें सिंधु जल समझौते पर रोक भी शामिल है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या भारत पाकिस्तान में फिर घुसकर मारेगा? पूरी खबर पढ़ें…
DRDO ने शुक्रवार को हाइपरसोनिक वेपन टेक्नोलॉजी में बड़ा मुकाम हासिल किया। हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) ने 1,000 सेकेंड से ज्यादा समय तक एक्टिव कूल्ड स्क्रैमजेट सबस्केल कंबस्टर का ग्राउंड टेस्ट किया। यह टेस्ट DRDO की स्टेट ऑफ आर्ट एडवांस सेंटर (स्क्रैमजेट कनेक्ट टेस्ट फैसिलिटी) में किया गया। इससे पहले जनवरी 2025 में भी इसी इंजन का 120 सेकेंड का सफल टेस्ट हुआ था। अब 1,000 सेकेंड के इस टेस्ट के बाद यह सिस्टम फुल-स्केल उड़ान के लिए तैयार माना जा रहा है। INS सूरत से 24 अप्रैल को मिसाइल की टेस्टिंग नेवी ने INS सूरत से 24 मार्च को मिसाइल की टेस्टिंग की। नेवी ने समुद्र में तैर रहे एक छोटे टारगेट को नष्ट किया। गुजरात के सूरत में दमन सी फेस पर INS सूरत तैनात है। यह युद्धपोत 164 मीटर लंबा और 7,400 टन वजनी है। इसकी अधिकतम गति 30 नॉट्स (लगभग 56 किमी/घंटा) है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों- ब्रह्मोस और बाराक-8 मिसाइल और AI बेस्ड सेंसर सिस्टम है। सफल टेस्टिंग के लिए रक्षा मंत्री ने DRDO को बधाई दी इस टेस्ट के साथ ही न सिर्फ इंजन डिजाइन की वैलिडेशन है, बल्कि नई टेस्ट फैसिलिटी की भी पहली बड़ी कामयाबी है। रक्षा मंत्रालय ने इसे DRDO, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के सहयोग से हासिल किया गया इंटीग्रेटेड एफर्ट बताया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सभी पार्टनर्स को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की क्रिटिकल हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी को हासिल करने की कमीटमेंट दिखाती है। DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े DG मिसाइल्स यू. राजा बाबू, DRDL डायरेक्टर डॉ. जीए श्रीनिवास मूर्ति और पूरी टीम को बधाई दी। हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत हाइपरसोनिक मिसाइलों पर DRDO लंबे समय से काम कर रहा है भारत भी कई वर्षों से हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में जुटा है। DRDO ने 2020 में एक हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटेड व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत HSTDV का इस्तेमाल करके अपनी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की ओर बढ़ रहा है। साथ ही भारत रूस के सहयोग से ब्रह्मोस-II मिसाइल के विकास में जुटा है, जोकि एक हाइपरसोनिक मिसाइल है। ब्रह्मोस-II की रेंज 1500 किमी तक होगी और स्पीड साउंड से 7-8 गुना ज्यादा (करीब 9000 किमी/घंटे) होगी। इसकी टेस्टिंग 2024 तक होने की उम्मीद है। इनके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देश हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने में जुटे हैं। वहीं नॉर्थ कोरिया भी हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने का दावा कर चुका है। —————————————- ये खबर भी पढ़ें … आज का एक्सप्लेनर:भारत लेगा पहलगाम हमले का बदला; क्या ड्रोन, मिसाइल अटैक या बम गिराएगा, जमीनी जंग में कौन-सी अड़चनें उरी में आतंकी घुसे, तो PoK में सर्जिकल स्ट्राइक की। पुलवामा में हमला हुआ, तो बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई। अब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की जान ली, तो भारत ने 5 बड़े कूटनीतिक कदम उठाए हैं, जिसमें सिंधु जल समझौते पर रोक भी शामिल है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या भारत पाकिस्तान में फिर घुसकर मारेगा? पूरी खबर पढ़ें…