मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी ने बुधवार को गद्दी पर बैठाया। मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच यह रस्म निभाई गई। इसके बाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने कुलगुरु समेत तमाम संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया। गद्दी की पूजा-अर्चना कर विराजमान होने के बाद लक्ष्यराज सिंह ने श्रीएकलिंगनाथजी की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। धूणी दर्शन किए। इसके बाद अश्व पूजन किया। शाम को उन्होंने एकलिंगनाथजी मंदिर में दर्शन किए। यहां शोक भंग की रस्म निभाई गई, जिसमें पगड़ी का रंग बदला गया। रात को भगवान जगदीश मंदिर में दर्शन के बाद यह रस्म पूरी होगी। 4 पॉइंट में समझिए गद्दी उत्सव की पूरी परंपरा… 1. सिटी पैलेस में सुबह हवन-पूजन से हुई शुरुआत
उदयपुर के सिटी पैलेस परिसर में सुबह करीब 9:30 बजे हवन-पूजन शुरू हुआ था। ओडिशा के डिप्टी सीएम और लक्ष्यराज सिंह के ससुर कनकवर्धन सिंह, जाने-माने कवि-एक्टर शैलेश लोढ़ा सहित तमाम लोग उदयपुर सिटी पैलेस में सुबह ही पहुंच चुके थे। सिटी पैलेस स्थित नौ चौकी महल के राय आंगन में सभी लोग सफेद रंग के कपड़े पहनकर आए। लक्ष्यराज सिंह ने सफेद कपड़ों में विधि-विधान से गद्दी उत्सव की परंपरा निभाई। इस दौरान लक्ष्यराज के बेटे हरितराज सिंह ने संतों का आशीर्वाद लिया। 2. घोड़े की पूजा की, आरती उतारी
सिटी पैलेस के शंभू निवास में दोपहर करीब 3 बजे लक्ष्यराज सिंह ने बेटे हरितराज के साथ अश्व पूजन किया। पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन करवाया। मेवाड़ में राजतिलक या फिर गद्दी पर विराजने की रस्म के साथ ही अश्व पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि अश्व को स्वामी भक्ति का प्रतीक माना जाता है। युद्ध के समय अश्व भी अपने राजा को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक था, जिसने हल्दीघाटी युद्ध में घायल होकर भी महाराणा प्रताप को युद्ध भूमि से सुरक्षित बाहर निकाला था। इसलिए मेवाड़ का पूर्व राजपरिवार विशेषकर राजतिलक या गद्दी विराजने के अलावा विशेष त्योहारों पर भी अश्व पूजन करता है। घोड़ा मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार का ही होता है। पूर्व राजपरिवार की अश्वशाला सिटी पैलेस और शिकारबाड़ी में है। महाराणा करण सिंह ने 1620-1628 ईस्वी में घोड़ों का अस्तबल बनाया था। हालांकि मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार में अस्तबल की परंपरा 1500 साल से भी पुरानी है। 3. एकलिंगजी के दर्शन किए, शोक भंग की रस्म निभाई
शाम करीब 6 बजे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ कैलाशपुरी स्थित एकलिंगनाथजी मंदिर दर्शन करने पहुंचे। यहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद शोक भंग की रस्म निभाई गई, जिसमें पगड़ी का रंग भी बदला गया। एकलिंगनाथजी मंदिर में दर्शन से पहले उन्होंने तालाब पूजन किया। कैलाशपुरी की महिलाओं ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया गया। जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। महिलाओं ने उनके स्वागत में धार्मिक गीत भी गाए। 4. हाथीपोल द्वार का पूजन किया
एकलिंगजी से आने के बाद रात करीब 7:30 बजे लक्ष्यराज सिंह उदयपुर शहर के हाथीपोल पहुंचे। यहां उन्होंने हाथीपोल द्वार का पूजन किया। इतिहास में यह शहर का मुख्य पोल हुआ करता था। जहां से शहर के अंदर एंट्री होती थी। पूजन के बाद आमजन ने लक्ष्यराज का पुष्प वर्षा और माला पहनकर स्वागत किया। रात 8:15 बजे भाईपा और सरदारों के रंगपलटाई दस्तूर की परंपरा निभाई जाएगी। लक्ष्यराज सिंह रात 9 बजे जगदीश मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे। बता दें कि लक्ष्यराज के पिता अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च को हुआ था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। गद्दी उत्सव की रस्म का वीडियो देखें… PHOTOS में देखिए पूर्व राजपरिवार का गद्दी उत्सव… उदयपुर पूर्व राजपरिवार से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… उदयपुर में अरविंद सिंह मेवाड़ का अंतिम संस्कार:बेटे लक्ष्यराज ने दी मुखाग्नि; MLA विश्वराज सिंह ने चाचा को दी विदाई उदयपुर में मेवाड़ के पूर्व राज परिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ (80) का अंतिम संस्कार 16 मार्च को किया गया था। बेटे लक्ष्यराज सिंह ने उनको मुखाग्नि दी थी। नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ भी अपने चाचा अरविंद सिंह मेवाड़ के दाह संस्कार में शामिल हुए थे। (पढ़ें पूरी खबर)
मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी ने बुधवार को गद्दी पर बैठाया। मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच यह रस्म निभाई गई। इसके बाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने कुलगुरु समेत तमाम संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया। गद्दी की पूजा-अर्चना कर विराजमान होने के बाद लक्ष्यराज सिंह ने श्रीएकलिंगनाथजी की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। धूणी दर्शन किए। इसके बाद अश्व पूजन किया। शाम को उन्होंने एकलिंगनाथजी मंदिर में दर्शन किए। यहां शोक भंग की रस्म निभाई गई, जिसमें पगड़ी का रंग बदला गया। रात को भगवान जगदीश मंदिर में दर्शन के बाद यह रस्म पूरी होगी। 4 पॉइंट में समझिए गद्दी उत्सव की पूरी परंपरा… 1. सिटी पैलेस में सुबह हवन-पूजन से हुई शुरुआत
उदयपुर के सिटी पैलेस परिसर में सुबह करीब 9:30 बजे हवन-पूजन शुरू हुआ था। ओडिशा के डिप्टी सीएम और लक्ष्यराज सिंह के ससुर कनकवर्धन सिंह, जाने-माने कवि-एक्टर शैलेश लोढ़ा सहित तमाम लोग उदयपुर सिटी पैलेस में सुबह ही पहुंच चुके थे। सिटी पैलेस स्थित नौ चौकी महल के राय आंगन में सभी लोग सफेद रंग के कपड़े पहनकर आए। लक्ष्यराज सिंह ने सफेद कपड़ों में विधि-विधान से गद्दी उत्सव की परंपरा निभाई। इस दौरान लक्ष्यराज के बेटे हरितराज सिंह ने संतों का आशीर्वाद लिया। 2. घोड़े की पूजा की, आरती उतारी
सिटी पैलेस के शंभू निवास में दोपहर करीब 3 बजे लक्ष्यराज सिंह ने बेटे हरितराज के साथ अश्व पूजन किया। पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन करवाया। मेवाड़ में राजतिलक या फिर गद्दी पर विराजने की रस्म के साथ ही अश्व पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि अश्व को स्वामी भक्ति का प्रतीक माना जाता है। युद्ध के समय अश्व भी अपने राजा को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक था, जिसने हल्दीघाटी युद्ध में घायल होकर भी महाराणा प्रताप को युद्ध भूमि से सुरक्षित बाहर निकाला था। इसलिए मेवाड़ का पूर्व राजपरिवार विशेषकर राजतिलक या गद्दी विराजने के अलावा विशेष त्योहारों पर भी अश्व पूजन करता है। घोड़ा मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार का ही होता है। पूर्व राजपरिवार की अश्वशाला सिटी पैलेस और शिकारबाड़ी में है। महाराणा करण सिंह ने 1620-1628 ईस्वी में घोड़ों का अस्तबल बनाया था। हालांकि मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार में अस्तबल की परंपरा 1500 साल से भी पुरानी है। 3. एकलिंगजी के दर्शन किए, शोक भंग की रस्म निभाई
शाम करीब 6 बजे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ कैलाशपुरी स्थित एकलिंगनाथजी मंदिर दर्शन करने पहुंचे। यहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद शोक भंग की रस्म निभाई गई, जिसमें पगड़ी का रंग भी बदला गया। एकलिंगनाथजी मंदिर में दर्शन से पहले उन्होंने तालाब पूजन किया। कैलाशपुरी की महिलाओं ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया गया। जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। महिलाओं ने उनके स्वागत में धार्मिक गीत भी गाए। 4. हाथीपोल द्वार का पूजन किया
एकलिंगजी से आने के बाद रात करीब 7:30 बजे लक्ष्यराज सिंह उदयपुर शहर के हाथीपोल पहुंचे। यहां उन्होंने हाथीपोल द्वार का पूजन किया। इतिहास में यह शहर का मुख्य पोल हुआ करता था। जहां से शहर के अंदर एंट्री होती थी। पूजन के बाद आमजन ने लक्ष्यराज का पुष्प वर्षा और माला पहनकर स्वागत किया। रात 8:15 बजे भाईपा और सरदारों के रंगपलटाई दस्तूर की परंपरा निभाई जाएगी। लक्ष्यराज सिंह रात 9 बजे जगदीश मंदिर में दर्शन के लिए जाएंगे। बता दें कि लक्ष्यराज के पिता अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च को हुआ था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। गद्दी उत्सव की रस्म का वीडियो देखें… PHOTOS में देखिए पूर्व राजपरिवार का गद्दी उत्सव… उदयपुर पूर्व राजपरिवार से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… उदयपुर में अरविंद सिंह मेवाड़ का अंतिम संस्कार:बेटे लक्ष्यराज ने दी मुखाग्नि; MLA विश्वराज सिंह ने चाचा को दी विदाई उदयपुर में मेवाड़ के पूर्व राज परिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ (80) का अंतिम संस्कार 16 मार्च को किया गया था। बेटे लक्ष्यराज सिंह ने उनको मुखाग्नि दी थी। नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ भी अपने चाचा अरविंद सिंह मेवाड़ के दाह संस्कार में शामिल हुए थे। (पढ़ें पूरी खबर)