गुजरात की एक पटाखा फैक्ट्री का बॉयलर फटने से एमपी के 21 मजदूरों की मौत हो गई। हादसा मंगलवार सुबह 8 बजे बनासकांठा के नजदीक डीसा में हुआ। 3 की हालत गंभीर है। वहीं, 5 मजदूर मामूली रूप से घायल हैं। सभी मजदूर हरदा जिले के हंडिया और देवास जिले के संदलपुर गांव के रहने वाले थे। मजदूरों की मौत की खबर से परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। सभी 2 दिन पहले ही मजदूरी के लिए गुजरात आए थे। विस्फोट के दौरान मजदूर पटाखा बनाने का काम कर रहे थे। धमाका इतना भीषण था कि कई मजदूरों के अंग 50 मीटर दूर तक बिखर गए। फैक्ट्री के पीछे खेत में भी कुछ मानव अंग मिले हैं। फायर ब्रिगेड को आग पर काबू पाने में 5 से 6 घंटे लगे। बुधवार को शवों को मध्यप्रदेश लाया जाएगा। 3 लोग 40 प्रतिशत से अधिक झुलस गए
गुजरात के डीसा की एसडीएम नेहा पांचाल ने बताया कि घटना में घायल सभी लोगों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल 3 लोगों का इलाज चल रहा है। ये 40 प्रतिशत से अधिक झुलस गए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे को लेकर प्रशासन की ओर से जांच जारी है। एमपी से मंत्री और अफसरों की टीम गुजरात रवाना
गुजरात में पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद राज्य सरकार की ओर से अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान बनासकांठा के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं हरदा कलेक्टर आदित्य सिंह ने बताया कि मृतकों की शिनाख्त और घायलों की मदद के लिए अफसरों की टीम भेजी है। इसमें संयुक्त कलेक्टर संजीव नागू, उप पुलिस अधीक्षक अजाक सुनील लाटा, तहसीलदार टिमरनी डॉ. प्रमेश जैन, नायब तहसीलदार देवराम निहरता तथा रहटगांव के पुलिस उप निरीक्षक मानवेंद्र सिंह भदोरिया शामिल हैं। इधर, देवास से भी अफसरों का एक दल वहां पहुंच रहा है। मृतकों के परिजन को आर्थिक सहायता की घोषणा
सीएम डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि संकट की इस दु:खद घड़ी में हमारी सरकार सभी पीड़ितों के परिवारों के साथ खड़ी है। सरकार हरसंभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। पीड़ितों को हर जरूरी मदद मुहैया कराई जाएगी। गुजरात सरकार ने भी मृतकों के परिजन को 4-4 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की है। इधर, मौत की खबर सुनकर रो पड़े परिजन परिजन बोले- खबर सुनी, फैक्ट्री में आग लग गई पटाखे बेचने का लाइसेंस था, बनाने का नहीं
दीपक ट्रेडर्स नाम की यह पटाखा फैक्ट्री खूबचंद सिंधी की है। वह इस फैक्ट्री में विस्फोटक लाकर पटाखा बनवाते थे। हालांकि अब तक की जांच में पता चला है कि कंपनी मालिक के पास केवल पटाखे बेचने का लाइसेंस है, बनाने का नहीं, इसलिए स्थानीय पुलिस आगे की जांच में जुटी है। घायल बोला- धमाका हुआ और बेहोश हो गए
घायल ने कहा- तेज धमाका हुआ और हम बेहोश हो गए दैनिक भास्कर की टीम ने पालनपुर के बनास मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भेजे गए विजय नाम के एक मजदूर से बात की। विजय ने कहा, ‘हम फैक्ट्री के अंदर काम कर रहे थे, तभी अचानक ब्लास्ट हुआ। हमें पता ही नहीं चला कि आखिर क्या हुआ था, बहुत तेज धमाका हुआ और हम बेहोश हो गए। जब मैंने अपनी आंखें खोलीं तो मेरे चारों ओर आग थी। हम झुलसी हालत में ही किसी तरह फैक्ट्री से बाहर भागे। तस्वीरों में देखिए हादसा… सिंघार का सवाल- रोजगार देने में सरकार इतनी अक्षम
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, सवाल सरकार से है कि हर दिन रोजगार का गाना गाने वाली सरकार इतनी अक्षम हो चुकी है कि मजदूरों को पलायन की आवश्यकता पड़ रही है, जिसमें उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है।
इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और लापरवाही के दोषियों को चिह्नित करके उन्हें सजा मिले। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को मध्यप्रदेश सरकार समुचित मुआवजा दे और घायलों का बेहतर इलाज कराए।
गुजरात की एक पटाखा फैक्ट्री का बॉयलर फटने से एमपी के 21 मजदूरों की मौत हो गई। हादसा मंगलवार सुबह 8 बजे बनासकांठा के नजदीक डीसा में हुआ। 3 की हालत गंभीर है। वहीं, 5 मजदूर मामूली रूप से घायल हैं। सभी मजदूर हरदा जिले के हंडिया और देवास जिले के संदलपुर गांव के रहने वाले थे। मजदूरों की मौत की खबर से परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। सभी 2 दिन पहले ही मजदूरी के लिए गुजरात आए थे। विस्फोट के दौरान मजदूर पटाखा बनाने का काम कर रहे थे। धमाका इतना भीषण था कि कई मजदूरों के अंग 50 मीटर दूर तक बिखर गए। फैक्ट्री के पीछे खेत में भी कुछ मानव अंग मिले हैं। फायर ब्रिगेड को आग पर काबू पाने में 5 से 6 घंटे लगे। बुधवार को शवों को मध्यप्रदेश लाया जाएगा। 3 लोग 40 प्रतिशत से अधिक झुलस गए
गुजरात के डीसा की एसडीएम नेहा पांचाल ने बताया कि घटना में घायल सभी लोगों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल 3 लोगों का इलाज चल रहा है। ये 40 प्रतिशत से अधिक झुलस गए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे को लेकर प्रशासन की ओर से जांच जारी है। एमपी से मंत्री और अफसरों की टीम गुजरात रवाना
गुजरात में पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद राज्य सरकार की ओर से अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान बनासकांठा के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं हरदा कलेक्टर आदित्य सिंह ने बताया कि मृतकों की शिनाख्त और घायलों की मदद के लिए अफसरों की टीम भेजी है। इसमें संयुक्त कलेक्टर संजीव नागू, उप पुलिस अधीक्षक अजाक सुनील लाटा, तहसीलदार टिमरनी डॉ. प्रमेश जैन, नायब तहसीलदार देवराम निहरता तथा रहटगांव के पुलिस उप निरीक्षक मानवेंद्र सिंह भदोरिया शामिल हैं। इधर, देवास से भी अफसरों का एक दल वहां पहुंच रहा है। मृतकों के परिजन को आर्थिक सहायता की घोषणा
सीएम डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि संकट की इस दु:खद घड़ी में हमारी सरकार सभी पीड़ितों के परिवारों के साथ खड़ी है। सरकार हरसंभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। पीड़ितों को हर जरूरी मदद मुहैया कराई जाएगी। गुजरात सरकार ने भी मृतकों के परिजन को 4-4 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की है। इधर, मौत की खबर सुनकर रो पड़े परिजन परिजन बोले- खबर सुनी, फैक्ट्री में आग लग गई पटाखे बेचने का लाइसेंस था, बनाने का नहीं
दीपक ट्रेडर्स नाम की यह पटाखा फैक्ट्री खूबचंद सिंधी की है। वह इस फैक्ट्री में विस्फोटक लाकर पटाखा बनवाते थे। हालांकि अब तक की जांच में पता चला है कि कंपनी मालिक के पास केवल पटाखे बेचने का लाइसेंस है, बनाने का नहीं, इसलिए स्थानीय पुलिस आगे की जांच में जुटी है। घायल बोला- धमाका हुआ और बेहोश हो गए
घायल ने कहा- तेज धमाका हुआ और हम बेहोश हो गए दैनिक भास्कर की टीम ने पालनपुर के बनास मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भेजे गए विजय नाम के एक मजदूर से बात की। विजय ने कहा, ‘हम फैक्ट्री के अंदर काम कर रहे थे, तभी अचानक ब्लास्ट हुआ। हमें पता ही नहीं चला कि आखिर क्या हुआ था, बहुत तेज धमाका हुआ और हम बेहोश हो गए। जब मैंने अपनी आंखें खोलीं तो मेरे चारों ओर आग थी। हम झुलसी हालत में ही किसी तरह फैक्ट्री से बाहर भागे। तस्वीरों में देखिए हादसा… सिंघार का सवाल- रोजगार देने में सरकार इतनी अक्षम
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, सवाल सरकार से है कि हर दिन रोजगार का गाना गाने वाली सरकार इतनी अक्षम हो चुकी है कि मजदूरों को पलायन की आवश्यकता पड़ रही है, जिसमें उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है।
इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और लापरवाही के दोषियों को चिह्नित करके उन्हें सजा मिले। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को मध्यप्रदेश सरकार समुचित मुआवजा दे और घायलों का बेहतर इलाज कराए।