पंजाब में खालिस्तान समर्थक और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के सात साथी कल देर रात अमृतसर पहुंचे। रात में पुलिस ने उन्हें अज्ञात जगह सेफ हाऊस में रखा। आज उन्हें अमृतसर के अजनाला कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। सुबह से ही अजनाला कोर्ट में सुरक्षा के चलते पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। सुबह 10 बजे कोर्ट खुलने के समय से दो घंटे पहले ही 8 बजे अमृतपाल के साथियों को लेकर पुलिस कोर्ट में पहुंची। सुरक्षा के चलते कोर्ट परिसर में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी। मीडिया को भी कोर्ट परिसर से दूर रखा गया। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने इस दौरान 7 दिन की रिमांड की मांग रखी थी। लेकिन कोर्ट से उन्हें 4 दिन का ही रिमांड दिया गया। पुलिस ने तर्क दिया कि आरोपियों का रिमांड हासिल कर हथियारों को रिकवर किया जाना है। इतना ही नहीं, मोबाइल फोन रिकवर किए जाने हैं ताकि उनकी जांच की जा सके। पंजाब पुलिस की विशेष टीमें अमृतपाल के सातों साथियों को दो जत्थों में डिब्रूगढ़ से दिल्ली लेकर आईं। देर शाम जब सातों साथी दिल्ली पहुंचे तो उन्हें देर रात अमृतसर शिफ्ट कर दिया गया। आज सभी साथियों को अमृतसर के अजनाला कोर्ट में पेश कर फरवरी 2023 में पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के लिए रिमांड हासिल किया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने इन सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जारी रखने से इनकार कर दिया है। जिसके बाद 6 दिन पहले पंजाब पुलिस अमृतपाल के साथियों को लेने असम के डिब्रूगढ़ पहुंची थी। सभी 7 साथी होंगे कोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार अमृतपाल सिंह, पप्पलप्रीत सिंह और वरिंदर विक्की को अभी डिब्रूगढ़ जेल में ही रहना होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उनके एनएसए की अगली सुनवाई 22 मार्च को होनी है, जिसके बाद सरकार आगे का फैसला लेगी। जबकि अभी तक सिर्फ 7 साथियों का एनएसए हटाने का फैसला लिया था। जिसके बाद उन्हें पंजाब शिफ्ट किया गया। जिनके नाम इस प्रकार हैं- तूफान की गिरफ्तारी पर अजनाला थाने पर किया था हमला 23 फरवरी 2023 को खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े हजारों लोगों ने अमृतसर के अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। इनके हाथों में बंदूकें और तलवारें थीं। ये लोग संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह के करीबी लवप्रीत सिंह तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। इनके हमले के बाद दबाव में आई पंजाब पुलिस ने आरोपी को रिहा करने का ऐलान कर दिया था। पुलिस ने उग्र भीड़ को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे, लेकिन ये उन्हें तोड़कर अंदर घुस गए। इसमें 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जानें अजनाला हिंसा क्यों हुई थी अमृतसर के अजनाला पुलिस थाने में अमृतपाल, उसके साथी तूफान सिंह समेत कुल 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है। इसी मामले में आज सातों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाना है। बता दें कि अमृतपाल के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले एक युवक को किडनैप करने के बाद उसे बुरी तरह पीटा था। दरअसल, 15 फरवरी की रात अजनाला में पहुंचे चमकौर साहिब के बरिंदर सिंह को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था। जंडियाला गुरु के पास मोटर पर (जहां अमृतपाल भी मौजूद था) बरिंदर सिंह के साथ मारपीट की गई थी। जिसकी शिकायत पर अमृतपाल व उसके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसी केस में पुलिस ने तूफान सिंह को गिरफ्तार किया था। इससे अमृतपाल भड़क गया और उसने अजनाला थाने के बाहर प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी देने की घोषणा की थी। SP हरपाल सिंह रंधावा ने बताया था कि हमलावर तलवार और बंदूकें साथ लाए थे। उनके पास श्री गुरुग्रंथ साहिब की पवित्र बीड़ भी थी। ऐसे में जवान पीछे हट गए थे।
पंजाब में खालिस्तान समर्थक और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के सात साथी कल देर रात अमृतसर पहुंचे। रात में पुलिस ने उन्हें अज्ञात जगह सेफ हाऊस में रखा। आज उन्हें अमृतसर के अजनाला कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। सुबह से ही अजनाला कोर्ट में सुरक्षा के चलते पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। सुबह 10 बजे कोर्ट खुलने के समय से दो घंटे पहले ही 8 बजे अमृतपाल के साथियों को लेकर पुलिस कोर्ट में पहुंची। सुरक्षा के चलते कोर्ट परिसर में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी। मीडिया को भी कोर्ट परिसर से दूर रखा गया। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने इस दौरान 7 दिन की रिमांड की मांग रखी थी। लेकिन कोर्ट से उन्हें 4 दिन का ही रिमांड दिया गया। पुलिस ने तर्क दिया कि आरोपियों का रिमांड हासिल कर हथियारों को रिकवर किया जाना है। इतना ही नहीं, मोबाइल फोन रिकवर किए जाने हैं ताकि उनकी जांच की जा सके। पंजाब पुलिस की विशेष टीमें अमृतपाल के सातों साथियों को दो जत्थों में डिब्रूगढ़ से दिल्ली लेकर आईं। देर शाम जब सातों साथी दिल्ली पहुंचे तो उन्हें देर रात अमृतसर शिफ्ट कर दिया गया। आज सभी साथियों को अमृतसर के अजनाला कोर्ट में पेश कर फरवरी 2023 में पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के लिए रिमांड हासिल किया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने इन सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जारी रखने से इनकार कर दिया है। जिसके बाद 6 दिन पहले पंजाब पुलिस अमृतपाल के साथियों को लेने असम के डिब्रूगढ़ पहुंची थी। सभी 7 साथी होंगे कोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार अमृतपाल सिंह, पप्पलप्रीत सिंह और वरिंदर विक्की को अभी डिब्रूगढ़ जेल में ही रहना होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उनके एनएसए की अगली सुनवाई 22 मार्च को होनी है, जिसके बाद सरकार आगे का फैसला लेगी। जबकि अभी तक सिर्फ 7 साथियों का एनएसए हटाने का फैसला लिया था। जिसके बाद उन्हें पंजाब शिफ्ट किया गया। जिनके नाम इस प्रकार हैं- तूफान की गिरफ्तारी पर अजनाला थाने पर किया था हमला 23 फरवरी 2023 को खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े हजारों लोगों ने अमृतसर के अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। इनके हाथों में बंदूकें और तलवारें थीं। ये लोग संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह के करीबी लवप्रीत सिंह तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। इनके हमले के बाद दबाव में आई पंजाब पुलिस ने आरोपी को रिहा करने का ऐलान कर दिया था। पुलिस ने उग्र भीड़ को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे, लेकिन ये उन्हें तोड़कर अंदर घुस गए। इसमें 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जानें अजनाला हिंसा क्यों हुई थी अमृतसर के अजनाला पुलिस थाने में अमृतपाल, उसके साथी तूफान सिंह समेत कुल 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है। इसी मामले में आज सातों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाना है। बता दें कि अमृतपाल के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले एक युवक को किडनैप करने के बाद उसे बुरी तरह पीटा था। दरअसल, 15 फरवरी की रात अजनाला में पहुंचे चमकौर साहिब के बरिंदर सिंह को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था। जंडियाला गुरु के पास मोटर पर (जहां अमृतपाल भी मौजूद था) बरिंदर सिंह के साथ मारपीट की गई थी। जिसकी शिकायत पर अमृतपाल व उसके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसी केस में पुलिस ने तूफान सिंह को गिरफ्तार किया था। इससे अमृतपाल भड़क गया और उसने अजनाला थाने के बाहर प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी देने की घोषणा की थी। SP हरपाल सिंह रंधावा ने बताया था कि हमलावर तलवार और बंदूकें साथ लाए थे। उनके पास श्री गुरुग्रंथ साहिब की पवित्र बीड़ भी थी। ऐसे में जवान पीछे हट गए थे।